18-21 फीसदी का फायदा आपको राजा बना सकता है  

मुंबई- देश के प्रसिद्ध और दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला के निधन से उन निवेशकों को झटका लगा है, जो उनके रास्ते पर चलते थे। हालांकि उनका मानना है कि एक औसत रिटर्न आपको राजा बना सकता है। उनकी निवेश की रणनीति क्या थी और निवेश की दुनिया में किस तरह का वे सिद्धांत रखते थे, इसी पर आधारित यह रिपोर्ट- 

5,000 रुपये का निवेश 37 साल में 46,000 करोड़ रुपये बन जाना। यही एक ऐसी रणनीति होती है जो हर किसी को आकर्षित करती है। अगर किसी भी पोर्टफोलियो से आपको सालाना 18 से 21 फीसदी का रिटर्न मिलता है तो समझिए आप राजा की तरह कमा रहे हैं। यह इसलिए क्योंकि पूरी दुनिया में कोई भी निवेश का परंपरागत साधन सालाना 5-7 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न नहीं देता है। इसके एवज में 18-21 फीसदी का फायदा 3 गुना ज्यादा होता है। लेकिन इसके लिए आपको यथार्थवादी उम्मीदों को कायम रखना होगा।  

निवेश के समय आपको महत्वपूर्ण बिंदुओं को पकड़ना होगा। आप एक ऐसे भविष्य में निवेश कर रहे हैं जो अनिश्चित है। एक समय के बाद इसकी भविष्यवाणी भी नहीं कर सकते। अनुचित मूल्यांकन पर कभी भी निवेश न करें। उन कंपनियों में निवेश के लिए कभी भी न दौड़ें जो सुर्खियों में हों। 

सभी बाजार की तेजी हमसे आगे है। शेयर बाजार हमेशा सही होता है। बाजार का कोई समय नहीं होता है। जब कयामत और अंधेरा हो तो यह मत भूलिए कि सुबह होने से पहले भी अंधेरा होता है। हमेशा कीमतों का सम्मान करें। हर कीमत पर एक खरीदार और एक विक्रेता होता है। कौन सही है यह तो भविष्य ही तय करता है। इसलिए सम्मान करें। हो सकता है आप गलत भी हो जाएं। उनका कहना था कि मुझे किसी कंपनी के मूल्यांकन में कोई दिलचस्पी नहीं है। मुझे उन कारोबारों में दिलचस्पी है जो बड़े पैमाने पर विकास करे। मूल्यांकन मेरे बिजनेस मॉडल और निरंतरता से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं हो सकता है। 

गलतियां होना स्वाभाविक है। पर गलती उस हद तक ही करें जिसे आप बर्दाश्त कर सकते हैं। यानी निवेश उतना ही करें, जितना डूबने पर आप संभलने के लायक हों। इससे आप आगे फिर से खड़े हो सकेंगे।  लेकिन एक ही गलती कभी न दोहराएं। जो आपके लिए महत्व रखता है वह यह कि जब आप सही थे, तब आपने कितना पैसा बनाया और जब गलत थे, तब कितना पैसा गंवाया। जोखिम के इस तीन अक्षर से हमेशा सावधान रहना चाहिए। इसका मतलब यह था कि निवेश उतना ही करें, जितना आप अल्पावधि (शॉर्ट टर्म) में गंवाने की हिम्मत रखते हैं। बाजार कभी भी तर्कहीन हो सकता है। 

शेयर बाजार में पिछले साल नायका, जोमैटो, पेटीएम, पॉलिसीबाजार जैसे स्टार्टअप आईपीओ लेकर आए। लेकिन झुनझुनवाला इन सभी से दूर रहे। उनका कहना था कि मैं स्टार्टअप की पार्टी में नहीं जाना चाहता। क्योंकि यह केवल दो दिनों की पार्टी है। भारत में डिजिटलीकरण अभियान तेज होने के बावजूद वे इससे दूर रहते थे। उनका कहना था कि मैं चाहता हूं कि स्टार्टअप एक ऐसे कारोबार मॉडल पर ध्यान केंद्रित करे जो 3 अरब डॉलर या 10 अरब डॉलर मूल्यांकन के बजाय नकदी पैदा करे। उसके पास कोई पूंजी नहीं है। इसलिए पूंजी महत्वपूर्ण है। 

झुनझुनवाला क्रिप्टो को भी गलत मानते थे। उनका कहना था कि जिस निवेश में एक दिन में 20 फीसदी तक का उतार-चढ़ाव हो, ऐसे में हमारी दिलचस्पी नहीं है। ऐसे निवेश में तो 5 डॉलर का भी निवेश गलत फैसला है। इक्विटी बाजार और क्रिप्टो पूरी तरह से अलग है। क्रिप्टो की दुनिया एक दिन ढह जाएगी। इसकी आपूर्ति पर कोई नियंत्रण नहीं है। न ही इसके मूल्य पर कोई नियंत्रण है।   

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