धान की खेती में कमी से पूरी दुनिया पर होगा असर, 13 फीसदी कम हुई बुवाई 

मुंबई- महंगाई की मार झेल रही दुनिया के लिए अच्छी खबर नहीं है। भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक (rice exporter) है। लेकिन मौजूदा खरीफ सीजन में देश में धान के रकबे में पांच अगस्त तक 13 फीसदी गिरावट आई है। धान पैदा करने वाले राज्यों में कम बारिश होने के कारण धान की बुवाई प्रभावित हुई है। इससे पूरी दुनिया की चिंता बढ़ गई है। इस साल गेहूं के उत्पादन में भी कमी आई है और इसकी सरकारी खरीद में भारी गिरावट आई है।  

पांच अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक धान का रकबा 272.30 लाख हेक्टेयर है जो पिछले साल इस तारीख तक 314.14 लाख हेक्टेयर था। एग्रीकल्चर मिनिस्ट्री ने सोमवार को इस बारे में आंकड़े जारी किए। 

धान उपजाने वाले राज्यों पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना में धान के रकबे में कमी आई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम उत्तर प्रदेश में आठ अगस्त कर 36 फीसदी कम बारिश हुई थी जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में इस मॉनसून में अब तक 43 फीसदी कम बारिश हुई है। इसी तरह बिहार में 38 फीसदी और झारखंड में 45 फीसदी कम बारिश हुई है। पश्चिम बंगाल के गंगा किनारे स्थित इलाकों में 46 फीसदी कम बारिश हुई है। 

भारत दुनिया में चावल का सबसे निर्यातक है और ग्लोबल मार्केट में उसकी हिस्सेदारी 40 फीसदी है। अगर भारत में इसकी पैदावार प्रभावित होती है तो इसका असर पूरी दुनिया के ट्रेड पर पड़ेगा। इसके दुनिया के सामने खाने-पीने का संकट खड़ा हो सकता है। इस साल गेहूं का उत्पादन भी कम हुआ है। 

पिछले फसल सत्र (जुलाई-जून) में भारत में 12.966 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ था। वित्त वर्ष 2021-22 में भारत ने 2.12 करोड़ टन चावल का निर्यात किया था। एक जुलाई को केंद्र के पास 4.7 करोड़ टन चावल का स्टॉक था। 

इस साल फरवरी से रूस-यूक्रेन में लड़ाई के बाद से दुनिया भर में खाने पीने की चीजों की कमी का संकट पैदा हो गया है। भारत में भी गेहूं की कीमत में तेजी आई थी। सरकार ने कीमतों को काबू में रखने के लिए काफी सारे उपाय किए हैं। सरकार ने इस साल 13 मई को गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी थी। हालांकि अफगानिस्तान इंडोनेशिया, कतर, बांग्लादेश, भूटान, वियतनाम, यमन और मलयेशिया जैसे जरूरतमंद देशों को गेहूं भेजा जा रहा है। 

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