बॉन्ड के ब्याज में तेजी से बैंकों के मुनाफे में आई कमी 

मुंबई- बॉन्ड के ब्याज में उछाल से पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान बैंकों के मुनाफे में कमी दर्ज की गई है। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का परिचालन मुनाफा 18,975 करोड़ से 33 फीसदी गिरकर 12,753 करोड़ रुपये रह गया। इसमें इसके पोर्टफोलियो को 6,549 करोड़ रुपये की चपत लगी। इसी तरह का असर दूसरे बैंकों पर भी पड़ा है।  

आंकड़े बताते हैं कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध 28 बैंकों की गैर ब्याज आय में जून तिमाही में 28 फीसदी की गिरावट आई है। इस समय 10 साल के बॉन्ड का ब्याज करीब 7.35 फीसदी है। अप्रैल के मुकाबले यह एक फीसदी बढ़ चुका है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में बॉन्ड का ब्याज बढ़कर 7.5 फीसदी तक जा सकता है।  

महंगाई और वृद्धि के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की वजह से दुनिया भर में मौद्रिक नीति की तस्वीर साफ नहीं है। ऐसे में आने वाले समय में ब्याज की दर 7.45 फीसदी तक जा सकती है। एसबीआई के चेयरमैन दिनेश खारा ने कहा, अगर 10 साल के बॉन्ड का ब्याज मौजूदा स्तर पर बना रहता है तो हमें 1,900 करोड़ रुपये का राइट बैक करना होगा। अगर ब्याज 7.75 फीसदी होता है तो हमें 2,000 से 3,000 करोड़ रुपये का प्रावधान करना होगा। लेकिन महंगाई में कमी और मुद्रा में मजबूती से ब्याज बढ़ने की उम्मीद कम है। 

बॉन्ड का दाम गिरने पर उसका ब्याज बढ़ जाता है। जबकि कीमत बढ़ने पर ब्याज कम हो जाता है। बॉन्ड पर ब्याज बढ़ना बैंकों के लिए घाटे का सौदा होता है। हालांकि बैंकों को तभी नुकसान होगा, जब वे बॉन्ड को बेचेंगे। इस वजह से इसका प्रावधान करते हैं। इसका मतलब यह है कि बैंक को अपनी आय का एक हिस्सा बॉन्ड पोर्टफोलियो से होने वाले कुल नुकसान की भरपाई के लिए अलग कर देना होता है। 

बैंक अधिकारियों का कहना है कि वे आरबीआई तक इस बात को पहुंचाएंगे। कुछ बैंकों ने इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) के जरिये अपनी स्थिति को बैठक में उठा भी चुके हैं। 2017 में आरबीआई ने बैंकों को मार्क टू मार्केट (एमटीएम) घाटे को कम करने की मंजूरी दी थी। ऐसी उम्मीद है कि जून तिमाही में बैंकों को एमटीएम के जरिये 13,000 करोड़ रुपये का घाटा हो सकता है। 

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