आरबीआई का असर, आईसीआईसीआई और पीएनबी ने महंगा किया लोन  

मुंबई- आरबीआई के रेपो दर बढ़ाने के तुरंत बाद देश के दो सबसे बड़े बैंकों ने इसका भार ग्राहकों पर डाल दिया। आईसीआईसीआई बैंक ने 0.50 फीसदी बढ़ाकर ईबीएलआर को 9.10 फीसदी कर दिया है। यह दर 5 अगस्त से लागू हो गई है। जबकि पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने भी इतनी ही बढ़त कर दर को 7.90 फीसदी कर दिया है। इसकी दर 8 अगस्त से लागू होगी। 

महंगाई दर के लगातार 7 फीसदी से ऊपर बने रहने पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो दर में शुक्रवार को 0.50 फीसदी की बढ़त कर दी। 3 दिन तक चली मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद गवर्नर शक्तिकांत दास ने इसकी जानकारी दी। इससे रेपो दर 4.90 फीसदी से बढ़कर अब 5.40 फीसदी पर पहुंच गया है। 3 महीने में तीसरी बार दरों में बढ़ोतरी की गई। इससे कुल बढ़त 1.40 फीसदी की हो गई है।  

मई में 0.40, जून में 0.50 और अब 0.50 फीसदी दर बढ़ी है। इस फैसले से ऑटो से लेकर पर्सनल लोन, होम लोन सहित अन्य कर्ज महंगे हो जाएंगे। कर्ज लेनेवालों को ज्यादा किस्त चुकानी होगी। रेपो वह दर होती है जिस दर पर आरबीआई बैंकों को पैसा देता है। जब आरबीआई बैंकों को महंगे ब्याज पर पैसा देता है तो इसका सीधा असर कर्ज लेनेवालों पर पड़ता है। 

बैंकर्स का कहना है कि 0.50 फीसदी ब्याज बढ़ने से ग्राहकों ग्राहकों की किस्त में 927 रुपये की बढ़त होगी। हालांकि यह अलग-अलग बैंकों की दर पर निर्भर होगी। दरअसल अभी भी हर बैंकों की अलग-अलग ब्याज दरें हैं। इसलिए अगर आपने कम ब्याज पर कर्ज लिया है तो कम किस्त आएगी, पर जो बढ़ोतरी होगी वह 927 रुपये की ही होगी। 

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, महंगाई चरम पर है। यह धीरे-धीरे कम होगी। हालांकि अभी भी यह हमारे स्तर से ज्यादा है। रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे कई झटकों के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था में स्थिरता है। चालू खाता घाटा का प्रबंधन किया जा रहा है. आरबीआई के पास इसके प्रबंधन की क्षमता है। खाद्य पदार्थों और दूसरी चीजों की कीमतों में कमी हो रही है। आने वाले समय में इसमें और गिरावट दिख सकती है। 

गवर्नर ने कहा, विश्व की कई मुद्राओं की तुलना में भारतीय रुपया बेहतर स्थिति में है। हालांकि चालू वित्तवर्ष में अगस्त तक 4.7 फीसदी की गिरावट आई है। डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट का कारण वैश्विक परिस्थितियां हैं। साथ ही डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है। रुपये में गिरावट का कारण भारतीय अर्थव्यवस्था की कमजोरी नहीं है। 

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