बैंकिंग सिस्टम की तरलता में जबरदस्त तेजी, 2 लाख करोड़ रुपये से ऊपर 

मुंबई। देश की बैंकिंग प्रणाली की तरलता में जबरदस्त तेजी आई है। यह 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई है। पिछले सप्ताह यह 500 अरब रुपये की गिरावट के साथ तीन साल के निचले स्तर पर पहुंच गई थी।  

व्यापारियों के अनुसार, पिछले हफ्ते की तुलना में तरलता में चार गुना की वृद्धि हुई है। दरअसल, टैक्स के लिए बैंकों से अच्छी खासी रकम की निकासी हुई थी। इस वजह से बैंकों के सामने तरलता की दिक्कत आ गई थी। हालांकि महीने के अंत में फिर से फंड की आवक शुरू हो गई। इससे अब स्थिति पहले से बेहतर है।  

कारोबारियों का कहना है कि इस हफ्ते के अंत तक एक बार फिर से टैक्स के रूप में बड़ी रकम बैंकों से निकलेगी। बावजूद उसके एक लाख करोड़ रुपये बैंकों में रहने की उम्मीद है। देश का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) जीडीपी के अनुपात में 2021-22 में 2.7 फीसदी पर रहा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 में यह अनुपात 3.1 फीसदी था जो कि 2017-18 में 2.3 फीसदी पर था। भारत अभी भी एफडीआई पाने वाले देशों में दुनिया में सबसे आकर्षक बना हुआ है। 

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