10 करोड़ के कारोबार पर ई-इनवॉइस जरूरी, जीएसटी में नया बदलाव 

मुंबई- जीएसटी में पंजीकृत सालाना 10 करोड़ रुपये या इससे ज्यादा के कारोबार वाली कंपनियों के लिए अब ई-इनवॉइस बनाना जरूरी होगा। इसे एक अक्तूबर से लागू किया जाएगा। यह उनके लिए होगा जो बीटूबी (बिजनेस टू बिजनेस) का कारोबार करती हैं।  

वित्तमंत्रालय ने कहा कि अभी 20 करोड़ रुपये और इससे ऊपर वाली कंपनियों के लिए यह जरूरी था। केंद्रीय उत्पाद और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने एक अगस्त को इसकी अधिसूचना जारी की। जीएसटी परिषद ने ई-इनवॉइस को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का निर्णय लिया था। 

एक अक्तूबर, 2020 से बीटूबी लेन देन उन कंपनियों के लिए जरूरी किया गया था, जिनका कारोबार 500 करोड़ रुपये था। एक जनवरी, 2021 को इसका दायरा 100 करोड़ के कारोबार वाली कंपनियों तक बढ़ा दिया गया था। अप्रैल, 2021 से 50 करोड़ रुपये वाली कंपनियों को इसमें शामिल किया गया। जबकि इसी साल एक अप्रैल से 20 करोड़ रुपये के कारोबार वाली कंपनियों को भी इसमें शामिल कर लिया गया। 

सीबीआईसी की योजना आगे चलकर 5 करोड़ रुपये के कारोबार वाली कंपनियों को भी इसके दायरे में लाने की है। डेलॉय इंडिया के भागीदार एमएस मणि ने कहा कि इस फैसले से जीएसटी के कर आधार का और विस्तार होगा। साथ ही बेहतर अनुुपालन को सक्षम बनाने के लिए कर अधिकारियों को अधिक आंकड़े मिल सकेंगे। हालांकि आगे चलकर सभी कैटेगरी के जीएसटी करदाताओं के लिए यह अनिवार्य होगा। 

सूत्रों के मुताबिक, मंत्रियों का समूह जीएसटी में से 12 फीसदी टैक्स स्लैब को हटाने पर विचार कर रहा है। जीएसटी के कुल राजस्व में 12 फीसदी स्लैब का योगदान सबसे कम केवल 8 फीसदी है, इसलिए इसे खत्म किया जा सकता है। मंत्रियों के समूह की रिपोर्ट सौंपने के लिए जून में 3 महीने का समय दिया गया था। 12 फीसदी स्लैब में फलों के जूस, बादाम, सोलर वॉटर हीटर और अन्य आते हैं। 

सभी कंपनियों के लिए इस व्यवस्था के लागू होने के बाद बी2बी लेनदेन पर जीएसटी के तहत कर अधिकारियों को बिल मिलान की जरूरत नहीं होगी। हाल में सीबीआईसी के चेयरमैन विवेक जौहरी ने कहा था कि भविष्य में ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि जहां कारोबारियों को सभी रिटर्न फॉर्म पहले से भरे हुए मिलेंगे। उसमें सभी जानकारियां होंगी। 

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