हवाई यात्रियों को घबराने की जरूरत नहीं, हवाई यात्रा पूरी तरह सुरक्षित 

मुंबई- हाल के दिनों में एयरलाइंस में आई दर्जनों गड़बड़ियों को लेकर पहली बार भारतीय विमानन नियामक डीजीसीए ने बयान दिया है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के प्रमुख अरुण कुमार ने कहा, हवाई यात्रियों को घबराने की जरूरत नहीं है। भारतीय विमानन क्षेत्र पूरी तरह से सुरक्षित हैं।  

उन्होंने कहा कि हाल के समय में जो भी गड़बड़ी सामने आई है, उसमें कोई भी बड़ा खतरा नहीं था। हालांकि, इसी दौरान भारत आने वाले विदेशी विमानों में भी 16 दिनों में 15 बार तकनीकी गड़बड़ी पाई गई है। भारत का एयरलाइन क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित है। यहां अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (आईसीएओ) के सभी नियमों का पालन किया जाता है। 

हाल के समय में स्पाइसजेट के विमानों में सबसे ज्यादा दिक्कतें पाई गई हैं। पिछले हफ्ते डीजीसीए ने इस कंपनी को अगले 8 हफ्तों तक 50 फीसदी ही विमान उड़ाने का निर्देश दिया गया है। अरुण कुमार ने कहा, जो भी दिक्कतें सामने आई हैं, वे नियमित तौर पर आती रहती हैं। विदेशी कंपनियों के साथ सभी विमानन कंपनियों को इस तरह की गड़बड़ियों से जूझना पड़ता है। 

कुमार ने कहा, जिस तरह की घटनाएं सामने आई हैं, उनसे पता चलता है कि विमानों के कलपुर्जों को बदलने की जरूरत थी। इसमें बाहरी परत में दरार की वजह से विंडशील्ड का टूटना, खराब वॉल्व, लैंडिंग गियर अपलॉक और अन्य कलपुर्जे शामिल हैं। इसके लिए कंपनियों को दो महीने का विशेष ऑडिट का समय दिया गया है। हमारा काम एयरलाइंस को बंद करने का नहीं, बल्कि सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। 

कलपुर्जे और प्रणाली में खराबी की वजह से एयरलाइंस के विमानों के साथ इस तरह की 150 घटनाएं हुई हैं। डीजीसीए ने 2 मई से 13 जुलाई के बीच विशेष अभियान के तहत 353 विमानों की जांच की। कुमार ने कहा, विमानों में हजारों कलपुर्जे होते हैं। यदि एक दो कलपुर्जों के साथ ऐसी दिक्कतें आती हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि हमेशा ऊंचा जोखिम हो सकता है और बड़ा हादसा हो सकता है।  

उन्होंने कहा, भारतीय विमानन के बेड़े दुनिया के कई देशों की तुलना में काफी नए हैं। फिर भी हमारा ध्यान पूरी तरह से सुरक्षा पर रहता है।भारतीय हवाई क्षेत्र में रोजाना 6,000 से ज्यादा विमानों की आवाजाही होती है। लोकसभा में नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 28 जुलाई को लोकसभा में कहा था कि एक जुलाई, 2021 से 30 जून, 2022 तक कुल 478 तकनीकी दिक्कतें विमानों में पाई गई थीं। 

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