क्या होता है विंडफ़ॉल टैक्स, जानिए कैसे लगाती है सरकार 

मुंबई- सरकार ने ईंधन के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स में कटौती की है। सरकार ने घरेलू बाजार में पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स की कीमतों को काबू में रखने के लिए हाल में विंडफॉल टैक्स लगाया था।  

विंडफॉल टैक्स ऐसी कंपनियों या इंडस्ट्री पर लगाया जाता है जिन्हें किसी खास तरह के हालात से तत्काल काफी फायदा होता है। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई थी। इससे तेल कंपनियों को काफी फायदा मिला था। मार्च तिमाही में कच्चे तेल की कीमत 139 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई थी जो 14 साल में इसका उच्चतम स्तर था।  

क्रूड की कीमत में उछाल से ओएनजीसी जैसी कंपनियों का फायदा मार्च तिमाही में कई गुना बढ़ गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तब कहा था कि सरकार इस बात से खुश है कि निर्यात बढ़ रहा है और कंपनियां जमकर लाभ कमा रही हैं। उन्होंने कहा था कि अपने नागरिकों की भलाई के लिए हमें इस लाभ में कुछ हिस्सा चाहिए। 

अमूमन सरकारें इस तरह के लाभ पर टैक्स के सामान्य रेट के ऊपर वन-टाइम टैक्स लगाती है। इसे विंडफॉल टैक्स कहते हैं। यह टैक्स वे कंपनियां या इंडस्ट्री चुकाती है जो खास परिस्थितियों के कारण फायदा कमा रही होती हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण तेल कंपनियां भारी मुनाफा काट रही थीं, इसलिए उन पर विंडफॉल टैक्स लगाया गया था। भारत ही नहीं इटली और यूके ने भी अपनी एनर्जी कंपनियों पर यह टैक्स लगाया था। इटली ने तेल कंपनियों के लाभ पर टैक्स 10 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया था जबकि यूके ने इसे 40 फीसदी से बढ़ाकर 65 फीसदी कर दिया था। 

माना जा रहा था कि ईंधन के निर्यात पर टैक्स बढ़ाने से सरकार को एक लाख करोड़ रुपये मिलेंगे। एक अनुमान के मुताबिक ओएनजीसी की हरेक रुपये की कमाई पर सरकार को 65 से 66 पैसे मिलते हैं। बाकी का इस्तेमाल एक्सप्लोरेशन गतिविधियों में होता है। क्रूड पर एक्साइज ड्यूटी लगाने से सरकार को सालाना 7,000 रुपये की कमाई होने का अनुमान था।  

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