रुपया पहली बार 80 पर बंद, 100 अरब डॉलर बेच गिरावट थामेगा आरबीआई 

मुंबई- डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया की गिरावट जारी है। बुधवार को यह पहली बार 80 के पार पहुंच कर बंद हुआ। उधर इससे निबटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) विदेशी मुद्रा भंडार से 100 अरब डॉलर बेचेगा। विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर यही रुझान रहा तो रुपया और गिर सकता है। ऐसे में आयातकों के साथ-साथ कई सारे मोर्चे पर इसका बुरा प्रभाव पड़ सकता है।  

इस साल जनवरी से अब तक रुपया 7 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। सूत्रों ने कहा, अगर रिजर्व बैंक इस समय रुपये की गिरावट को नहीं थामता है तो आगे भारतीय मुद्रा और कमजोर हो सकती है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक 100 अरब डॉलर से ज्यादा भी बेच सकता है। 

रुपये की अभी और खराब स्थिति आनी बाकी है। ज्यादातर विश्लेषकों और व्यापारियों का मानना है कि आगे रुपया और गिरेगा। हालांकि आरबीआई का अभी उठाया गया कदम इसे कुछ हद तक मदद दे सकता है। सिंगापुर के एक व्यापारी ने कहा, इसकी बहुत कम संभावना है कि विदेशी निवेशक तेजी से भारत में वापसी करेंगे, क्योंकि ब्याज दरें अभी ऊपर ही जाएंगी। 

सूत्रों ने कहा, सरकार और आरबीआई लगातार विदेशी निवेशकों की वापसी की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि अगले एक महीने में विदेशी निवेशक बाजार में वापस आ जाएंगे। एक व्यापारी ने कहा कि अमेरिका में मौद्रिक नीतियों की सख्ती से ऐसी आशंका है कि रुपया आगे 84 से 85 तक जा सकता है। ऐसे में 100 अरब डॉलर बेचने का फैसला 4 महीने तक रुपये को थाम सकता है। 

वैसे रुपये की गिरावट वैश्विक स्तर की स्थितियों के अनुरूप है। अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की आक्रामक मौद्रिक सख्ती की नीति और निवेशकों द्वारा डॉलर के पक्ष में जोखिम वाली संपत्तियों को बेचने से रुपया कमजोर हो रहा है। सूत्रों ने कहा, आरबीआई रुपये की गिरावट को बहुत जल्दी थामने की कोशिश नहीं करता है। हालांकि उसके पास इतना साधन है कि वह कभी भी रुपये की गिरावट को रोक सकता है। जरूरत पड़ने पर वह बहुत ज्यादा डॉलर बेच सकता है। 

केंद्रीय बैंक के पास पिछले साल सितंबर में 642 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार था। तब से अब तक इसमें 60 अरब डॉलर की कमी आ चुकी है। इस समय 580 अरब डॉलर का भंडार है। गिरावट के बावजूद आरबीआई का भंडार दुनिया के केंद्रीय बैंकों में पांचवां सबसे बड़ा भंडार हैं। इससे केंद्रीय बैंक किसी भी तेज गिरावट को रोकने में सक्षम है। भारत के मैक्रो फंडामेंडल मजबूत बने हुए हैं। इससे डॉलर की तेज रफ्तार की रुझान उलटा भी हो सकती है। 

रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण कमोडिटी की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। इससे आने वाले समय में भारत का व्यापार और चालू खाता घाटा भी बढ़ेगा। खासकर देश में तेल के आयात का बिल इसमें ज्यादा मदद करेगा। सूत्रों ने कहा, रुपये की बहुत ज्यादा गिरावट में अमेरिकी डॉलर की मजबूती और तेल की ऊंची कीमतें मददगार हैं। 

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