मंदी का होगा भयानक असर, 7 करोड़ लोग जा सकते हैं गरीबी की चपेट में 

मुंबई- अंतर्राष्ट्रीय संगठन आईएमएफ (IMF) की माने तो मुसीबतें अभी और बढ़ने वाली हैं और अगले साल स्थितियां और बिगड़ सकती हैं। आईएमएफ की प्रमुख क्रिस्टिलीना जिर्योजिएवा ने अपने एक ब्लॉग में आगे आने वाले संकट को लेकर बात की है।  

ब्लॉग की माने तो 2022 मुश्किल बीतेगा और 2023 उससे भी मुश्किल होगा. उनके मुताबिक महंगाई की ऊंची दर से जल्द छुटकारा नहीं मिलेगा और इसकी वजह से दुनिया के गरीब देशों में 7 करोड़ और लोग बेहद गरीबी की चपेट में आ जाएंगे। 

ब्लॉग में कहा गया है कि बढ़ती महंगाई और सप्लाई में समस्या से गरीब देशों के लोगों पर सबसे बुरा असर पड़ेगा. उन्होने भारत का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ देशों के द्वारा खाद्यान्न पर प्रतिबंध से खाने पीने की समस्या और बढ़ेगी। अधिकांश गरीब देश 5 प्रतिशत से ज्यादा की महंगाई दर का सामना कर रहे हैं। आने वाले समय में इनकी स्थिति और बुरी हो सकती है और दुनिया भर में बढ़ती महंगाई और खाद्यान्न की कमी से 7.1 करोड़ लोग बेहद गरीबी की स्थिति में पहुंच सकते हैं।  

आईएमएफ प्रमुख की माने तो फिलहाल दुनिया भर के लिए सबसे बड़ी चिंता बढ़ती हुई महंगाई दर है। आईएमएफ के अनुमानों के अनुसार विकसित देशों में साल 2022 के दौरान महंगाई दर 5.7 प्रतिशत रह सकती है। वहीं विकासशील देशों में महंगाई दर 8.7 प्रतिशत रह सकती है। उनके मुताबिक इससे आशंका है कि महामारी के बाद अर्थव्यवस्थाओं ने जो भी रिकवरी हासिल की थी महंगाई उसे खत्म कर सकती है।  

उनके मुताबिक जुलाई 2021 के बाद से 75 केंद्रीय बैंक औसत 3.8 बार दरों में बढ़ोतरी कर चुके हैं। आईएमएफ प्रमुख ने अपने ब्लॉग में माना कि महंगाई को कम रखने की रणनीति से ग्रोथ पर बुरा असर देखने को मिलेगा। उन्होने कहा कि इस बात के पूरे संकेत है कि जून तिमाही में अर्थव्यवस्थाओं की रफ्तार धीमी रहेगी। और आगे के लिए अनिश्चितता और बढ़ेगी. इससे संभव है कि दुनिया भर के ग्रोथ अनुमानों में और कटौती हो सकती है।  

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