जानिए किसने शुरू किया था रुपया शब्द, कैसे यह अब तक चल रहा   

मुंबई- रुपया शब्द संस्कृत के रुप्यकम से आया है। इसका मतलब होता है चांदी का सिक्का। रुपया शब्द का प्रयोग सबसे पहले शेरशाह सूरी ने किया था। उन्होंने 1540 से 1545 तक भारत पर राज किया था। शेरशाह सूरी ने अपने शासन काल में जो रुपया चलाया वह चांदी का सिक्का था। यह मुगल काल, मराठा साम्राज्य और ब्रिटिश काल में भी चलन में रहा।  

देश में सबसे पहले कागज के नोट बैंक ऑफ हिंदोस्तान (1770-1832), जनरल बैंक ऑफ बंगाल एंड बिहार (1773-75) तथा बंगाल बैंक (1784-91) ने जारी किए थे। एक अप्रैल 1935 में देश में रिजर्व बैंक की स्थापना हुई थी। जनवरी, 1938 में रिजर्व बैंक ने पांच रुपये का पहला नोट जारी किया था। फरवरी-जनवरी, 1938 में 10 रुपये, 100 रुपये, 1,000 रुपये और 10,000 रुपये के नोट जारी किए थे।  

अगस्त 1940 एक रुपये के नोट को फिर से शुरू किया गया। इसे सबसे पहले 30 नवंबर, 1917 को जारी किया गया था। इसके बाद दो आना और आठ आना जारी किए गए थे। एक रुपये के नोट को एक जनवरी, 1926 को बंद कर दिया था। मार्च, 1943 में दो रुपये का नोट शुरू किया गया था। 

आजादी के बाद 1950 में एक पैसा, 1.2 पैसा, एक आना और दो आना, 1.4, 1.2 और एक रुपये मूल्य के सिक्के जारी किए गए। 1953 में नए नोटों पर हिंदी को प्रमुखता दी गई और 1954 में रुपया का बहुवचन रुपये किया गया। इसके बाद 1954 में 1,000 रुपये, 5,000 रुपये और 10,000 रुपये के बड़े नोट फिर जारी किए गए। साल 1957 में रुपये को 100 नए पैसे में बांटा गया। 1957-67 में एल्युमिनियम के एक, दो, तीन, पांच और दस पैसे के सिक्के शुरू किए गए। 

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