मोदी राज में 25 फीसदी टूटा भारतीय रुपैया, अब और गिरा, 80 पर पहुंचा  

मुंबई- डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर 80 पर पहुंच गया। हालांकि बाद में यह थोड़ा संभलकर बंद हुआ। सोमवार को ये 16 पैसे कमजोर होकर रिकॉर्ड 79.97 पर बंद हुआ। इस बीच कल से शुरू हुए संसद के मानसून सत्र में भी रुपए के टूटने का मुद्दा उठा। 

लोकसभा में इससे जुड़े एक प्रश्न के लिखित जबाव में केंद्र सरकार ने माना कि बीते 8 साल में (दिसंबर 2014 के बाद) डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमतों में 25.39% की गिरावट आई है। जनवरी 2022 से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया में लगभग 7.5% की गिरावट आई है। जनवरी में रुपया 73.50 के करीब था। 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रुपए के टूटने के कारण बताए। उन्होंने कहा, ‘रूस-यूक्रेन जंग जैसे कारण, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और वित्तीय स्थितयों का कड़ा होना, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए के कमजोर होने के प्रमुख कारण हैं।’ उन्होंने कहा, ‘ब्रिटिश पाउंड, जापानी येन और यूरो जैसी करेंसी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए की तुलना में ज्यादा कमजोर हुई हैं। 

उन्होंने कहा, भारतीय रिजर्व बैंक नियमित रूप से विदेशी मुद्रा बाजार की निगरानी करता है और एक्सेस वोलेटिलिटी (अतिरिक्त अस्थिरता) में हस्तक्षेप करता है। विदेशी निवेशकों ने वित्त वर्ष 2022-23 में अब तक करीब 14 अरब डॉलर निकाले हैं। सिर्फ जुलाई में ही FPI ने 7400 करोड़ रुपए की निकासी भारतीय बाजारों से की है। 

कच्चे तेल का आयात महंगा होगा, जिससे महंगाई बढ़ेगी। देश में सब्जियां और खाद्य पदार्थ महंगे होंगे। वहीं भारतीयों को डॉलर में पेमेंट करना भारी पड़ेगा। यानी विदेश घूमना महंगा होगा, विदेशों में पढ़ाई महंगी होगी। निर्यात करने वालों को फायदा होगा, क्योंकि पेमेंट डॉलर में मिलेगा, जिसे वह रुपए में बदलकर ज्यादा कमाई कर सकेंगे। इससे विदेश में माल बेचने वाली IT और फार्मा कंपनी को फायदा होगा। 

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