लोन वाले ऐप को ऐसे पहचानें, नकली है या असली, कैसे लगाएगा चूना  

मुंबई- लोन लेने के चक्कर में आपके घर पर रिकवरी एजंट धमक जाए और लोन से अधिक पैसा वसूल ले जाए। इससे बचने का एक ही उपाय है कि लोन ऐप को पहचानें, उसके बारे में जानें। उसकी असलियत जानने के बाद ही लोन के लिए अप्लाई करें क्योंकि गलत ऐप के चक्कर में आप तो फंसेंगे ही, आपके संगी-साथी भी शिकार हो सकते हैं। 

बाकी ऐप की तरह लोन ऐप भी डाउनलोड होने पर अपने साथ यूजर की कांटेक्ट डिटल ले जाते हैं। यानी कि यूजर की कांटेक्ट लिस्ट ऐप कंपनी के पास चली जाती है. लोन लेने वाला व्यक्ति अगर समय पर पैसा न चुकाए या पैसा लेकर चंपत हो जाए तो ऐप कंपनी के एजंट कांटेक्ट लिस्ट वाले लोगों को परेशान करते हैं। यहां तक कि लेनदार से जल्द लोन का पैसा जमा करने के लिए धमकी देते हैं।  

इन रिकवरी एजंट से जुड़ी कई वारदात सामने आ चुकी हैं। इसलिए आप भी कोई ऐप डाउनलोड करते हैं तो एक बार सावधान हो जाएं। लोन ऐप के बारे में पूरी सच्चाई जानने के बाद ही उसे डाउनलोड करें। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि एंड्रायड यूजर के लिए चलने वाले अलग-अलग ऐप स्टोर पर तकरीबन 600 अवैध लोन ऐप चल रहे हैं। इसलिए ग्राहक जब भी कोई लोन ऐप डाउनलोड करने चले तो उसकी रेटिंग, रिव्यू जरूर पढ़ ले।  

लोन ऐप को कौन सी कंपनी चला रही है और उसे किस कंपनी ने डेवलप किया है। इस तरह की जानकारी अगर ठीक-ठीक मिलती है, कंपनी का ट्रैक रिकॉर्ड सही पाते हैं, तभी उस ऐप को डाउनलोड करें। अगर ऐसी जानकारी न मिले तो उस ऐप से सावधान रहें। कंपनी की वेबसाइट, कांटेक्ट डिटेल, ऑफिस का पता भी चेक करें। नकली या फर्जीवाड़ा करने वाले ऐप इस तरह की जानकारी अकसर छिपा ले जाते हैं। 

सबसे पहले यह जरूर चेक करें कि लोन ऐप के साथ कोई बैंक जुड़ा है या नहीं। लोन ऐप के साथ नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी जुड़ी होती है. गूगल पॉलिसी साफ कहती है कि किसी भी लोन ऐप के साथ अनिवार्य तौर पर कोई न कोई एनबीएफसी जरूर जुड़ा होना चाहिए। अगर कोई बैंक ऐप के साथ नहीं जुड़ा है तो उससे सावधान हो जाएं। एनबीएफसी को भी अपने प्लेटफॉर्म पर बताना होगा कि उसके साथ कौन सा लेंडिंग ऐप चल रहा है।  

फर्जी ऐप यूजर से कई तरह की जानकारी मांगते हैं। यह जानकारी ग्राहक के परमिशन के द्वारा दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि अच्छा ऐप वही होता है जो यूजर से कम के कम परमिशन में इस्तेमाल की इजाजत देता है। इससे पर्सनल डेटा चोरी होने का खतरा नहीं होता।  

असली लोन ऐप होगा तो वह ग्राहक को लोन देने से पहले अपनी पूरी जानकारी देगा। ये सभी काम पारदर्शिता के साथ किए जाते हैं जिसमें लोन देने वाली कंपनी और यूजर के बीच एक करार होता है। लुटेरे या नकली ऐप के साथ यह सुविधा नहीं मिलती. ऐसे ऐप यूजर को पूरी जानकारी नहीं देते और किसी वैध एग्रीमेंट के लिए भी तैयार नहीं होते।  

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