एक से अधिक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के मामले में क्लेम कैसे करें

मुंबई- लगातार बढ़ते संक्रमण, बदलती हुई लाइफस्टाइल और कोविड महामारी जैसी परिस्थितियों में आज भारत के ज्यादा से ज्यादा लोग एक से अधिक अर्थात मल्टीपल हेल्थ इंश्योरेंस की ओर मुड़ रहे हैं ताकि इस महंगाई में हेल्थ प्रॉब्लम से उपजी परेशानियों और महंगे इलाज से खुद को और प्रियजनों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।  

हालांकि मल्टीपल हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज और क्लेम करने को और भी ज्यादा लचीला (flexible)बना देता है और संभावित रूप से किसी सिंगल पॉलिसी की तुलना में अस्पताल में भर्ती होने से जुड़े फाइनैन्शल रिस्क को ज्यादा कम कर सकता है, पर यह भी जरूरी है कि पॉलिसीधारक इसके क्लेम प्रक्रिया को ठीक से जान और समझ लें, ताकि आप एक से अधिक क्लेम फाइल कर अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकें।  

आइए देखें कि जब कई किसी ने एक से अधिक बीमा कराया हो तो इन परिस्थितियों में हेल्थ इंश्योरेंस का क्लेम कैसे फाइल करना चाहिए और इसके लिए नॉन हॉस्पिटलाइजेशन के मामले में क्या आवश्यक दस्तावेज चाहिए होते हैं। कई वेतन भोगी कर्मचारियों की कम से कम दो हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियां होती हैं। एक कंपनी का और दूसरा उनका व्यक्तिगत हेल्थ इंश्योरेंस कवर। ऐसे मामलों में, या जिन्होंने खुद से दो पॉलिसियां खरीदी होती हैं, वह किसी भी नेटवर्क वाले कैशलेस अस्पताल में भर्ती हो सकता है और किसी भी बीमा कंपनी के साथ क्लेम फाइल कर सकता है।  

बीमाधारक को तब पहले बीमाकर्ता से क्लेम सेटलमेंट के लिए डिस्चार्ज समरी लेने करने की आवश्यकता होती है और फिर उसे अस्पताल के बिल की सत्यापित प्रतियों के साथ दूसरे बीमाकर्ता को जमा करना होता है। यह तब लागू होता है जब बिल पहली पॉलिसी की बीमित राशि से अधिक हो जाता है और शेष राशि का भुगतान दूसरी बीमा कंपनी द्वारा किया जाएगा. दूसरे क्लेम को रीइमबरस्मेंट दावे के रूप में माना जाता है और इसलिए बीमाधारक को खुद से बिल पे करना होगा जिसे दूसरी बीमा कंपनी एक निश्चित समय के भीतर बाद में रीइंबर्स करेगी।  

यदि वह अस्पताल दोनों बीमा कंपनियों के नेटवर्क में हैं तो दावेदार के आग्रह पर दोनों बीमाकर्ताओं से कैशलेस को मंजूरी दी जा सकती है। हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में से किसी एक के लिए नॉन-नेटवर्क अस्पताल में भर्ती होने के मामले में, बीमाधारक को सभी बिलों को सीधे अस्पताल के को अदा करना पड़ेगा और फिर क्लेम प्रक्रिया का पालन करना होगा।  

प्रक्रिया के तहत सभी लैब रिपोर्ट, एक्स-रे फिल्म और स्लाइड, बिल, रसीदें और अस्पताल से मिली डिस्चार्ज समरी सहित सभी दस्तावेजों की सत्यापित प्रतियों के साथ एक क्लेम फॉर्म जमा करने की आवश्यकता होती है. यदि कुल बिल बीमा राशि से अधिक हो जाता है, तो शेष राशि का क्लेम अन्य हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के साथ किया जा सकता है। यह ध्यान देने की आवश्यकता है कि ऐसे क्लेम्स  में सेटलमेंट के लिए एक लीड टाइम शामिल होता है क्योंकि बीमा कंपनी मैन्युअल रूप से प्रस्तुत किए गए क्लेम्स  की समीक्षा करेगी और पात्रता के आधार पर राशि का सेटलमेंट करेगी।

अक्सर किसी सर्जरी या बीमारी के लिए अस्पताल में भर्ती होने के बाद आमतौर पर उपचार या पोस्ट-हॉस्पिटलाइजेशन थेरेपी दी जाती है जो बीमित व्यक्ति के लिए अतिरिक्त खर्च बन जाती है। डिस्चार्ज के बाद के ऐसे खर्च जिनमें दवाएं, फॉलो-अप कंसल्टेशन विजिट और डायग्नोस्टिक टेस्ट शामिल हैं, डिस्चार्ज की तारीख से 60 दिनों तक कवर किए जाते हैं। हालांकि, फिजियोथेरेपी या एक्यूपंक्चर जैसे कुछ उपचारों को कवर नहीं किया जा सकता है और यह इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें पॉलिसी कवरेज के हिस्से के रूप में शामिल किया गया है या नहीं। 

क्लेम के संदर्भ में, यह प्रक्रिया अस्पताल में भर्ती होने के खर्चों की रिम्बर्समेंट जैसा होता है और आमतौर पर अस्पताल में भर्ती होने से पहले किए गए खर्चों के मामले में भी होती है. इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां कुछ उपचारों को बाहर कर सकती हैं, यह सुझाव दिया जाता है कि खरीदे गए सभी कवरों की समीक्षा करें और बीमाकर्ता पर ऐसे खर्चों के लिए क्लेम करें जिन्होंने उन्हें पॉलिसी कवरेज में शामिल किया है। 


यह बात सही है कि कई हेल्थ इंश्योरेंस कवर होने से चिकित्सा आपात स्थिति के मामलों में वित्तीय राहत मिल सकती है, पर यह भी जरूरी है कि खरीदी गई सभी पॉलिसियों के लिए नियम और शर्तों को ध्यान से पढ़ना महत्वपूर्ण है. क्लेम्स की प्रक्रिया को आसान बनाने और रिम्बर्समेंट तेजी से पाने के लिए एक ही बीमा पॉलिसी चुनने की सिफारिश की जाती है। 

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