डोलो ने डाक्टरों को रिश्वत के रूप में दे दिया 1,000 करोड़ रुपये

मुंबई- कोरोना काल में कई दवा कंपनियां अमीर हो गईं। इनमें एक नाम माइक्रो लैब्स का भी है। जो डोलो-650 बनाती है। यह वही दवा है जो कोरोना काल में ‘रामबाण’ और शर्तिया इलाज का माध्यम बनकर उभरा था। जिस डॉक्टर को देखो या जिस केमिस्ट की दुकान पर जाओ, बुखार का लक्षण बताते ही डोलो-650 टैब्लेट ही पकड़ाता था। अब इस कंपनी के बारे में हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं।

एक खुलासा आयकर विभाग की ओर से किया गया है। विभाग की जांच में पता चला है कि माइक्रो लैब्स ने कमाई बढ़ाने के लिए डॉक्टरों को गिफ्ट देने का खास चलन शुरू किया। खुलासे के मुताबिक, डॉक्टरों को 1,000 करोड़ रुपये के गिफ्ट या उपहार बांट दिए गए।

आयकर विभाग ने कहा है कि डोलो बनाने वाली कंपनी ने अपना धंधा बढ़ाने के लिए अनैतिक काम का रास्ता अख्तियार किया और मेडिकल पेशे से जुड़े लोगों को हजार करोड़ रुपये के गिफ्ट बांट दिए। जब डॉक्टरों को इतने रुपये के उपहार, महंगे गिफ्ट मिलेंगे तो वे जाहिर सी बात है कि डोलो-650 ही लिखेंगे। प्राइम लैब्स के साथ भी यही हुआ।

ध्यान रहे कि डोलो-650 कोई महंगी दवा नहीं, न तो कोई महंगी एंटिबायोटिक है बल्कि साधारण बुखार की दवा है। लेकिन एक बुखार की दवा इतना कमाल कर गई कि करोड़ों में उसकी कमाई हो गई। मामला यही तक नहीं है। मामला धीरे-धीरे आयकर विभाग की नजरों में आया और आज 1,000 करोड़ के नए एंगल का पता चला है।

बेंगलुरु से चलने वाली इस कंपनी के दफ्तर पर छापेमारी हुई है जिससे कई बातें सामने आई हैं। छापेमारी 6 जुलाई को हुई थी, तब से यह कंपनी और डोलो टैब्लेट सुर्खियों में हैं। छापेमारी भी साधारण नहीं थी बल्कि देश के 9 राज्यों में फैले 36 ठिकानों पर एकसाथ छापा पड़ा। इससे चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है।

माइक्रो लैब्स का काम कोई छोटा नहीं है। यह कंपनी दवा बनाने के साथ ही दवाई की मार्केटिंग और एक्टिव फार्मास्युटिकल्स इनग्रेडिएंट का बिजनेस करती है। इसका कारोबार दुनिया के 50 देशों में पसरा हुआ है। छापेमारी के दौरान आयकर विभाग को कागजी सबूतों के अलावा डिजिटल डेटा भी हाथ लगे हैं।

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