सोने के कर्ज में घट रही है एनबीएफसी हिस्सेदारी, गरीबी में बेच रहे हैं गहना 

मुंबई- कई दशकों से सोने के एवज में कर्ज देने वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की हिस्सेदारी अब घट रही है। इसके उलट बैंक इस क्षेत्र में तेजी से अपना कारोबार बढ़ा रहे हैं। 2019-20 से 2021-22 में जहां मुथूट और मन्नापुरम की कर्ज वृद्धि में भारी गिरावट आई, वहीं, इसी अवधि के दौरान एचडीएफसी और केनरा बैंकों के कर्ज में भारी तेजी आई।  

केनरा बैंक में गोल्ड लोन के मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) भावेंद्र कुमार कहते हैं कि कोविड में जब लोगों को मेडिकल के लिए पैसों की जरूरत हुई तो ग्राहकों ने बैंकों की ओर रूख किया। बैंकों का कर्ज इसलिए बढ़ रहा, क्योंकि उनकी ब्याज दरें एनबीएफसी की तुलना में काफी कम है। बैंक 7.4 फीसदी की दर से कर्ज दे रहे हैं। एनबीएफसी 12 से 24 फीसदी के बीच में दे रहे हैं। 

दरअसल पिछले दो तीन सालों में सोने के एवज में कर्ज लेने की रफ्तार तेजी से बढ़ी है। ऐसा इसलिए क्योंकि कोरोना के बाद लोगों की बिगड़ी हालत अभी भी नहीं सुधरी है। साथ ही महंगाई बढ़ने से गरीबी भी बढ़ी है। ऐसे में लोग अपने पुराने गहनों को बेचकर किसी तरह से रोजी रोटी चला रहे हैं।  

आंकड़े बताते हैं कि सोने के एवज में कर्ज देनेवाली बड़ी एनबीएफसी के कर्ज की वृद्धि में गिरावट आ रही है। वित्तवर्ष 2019-20 में मुथूट का असेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) एक साल पहले की तुलना में 21 फीसदी बढ़कर 40,800 करोड़ रुपये था। 2020-21 में इसमें 27 फीसदी की बढ़त हुई और यह 51,900 करोड़ था। लेकिन 2021-22 में यह केवल 11 फीसदी बढ़ा और 57,500 करोड़ रुपये रहा।  

मन्नापुरम का कारोबार 2019-20 में 31 फीसदी बढ़कर 17,000 करोड़, 2020-21 में 12 फीसदी बढकर 19,100 और 2021-22 में केवल 4 फीसदी बढ़कर 19,900 करोड़ रुपये रहा। एचडीएफसी बैंक ने कहा है कि उसका भी गोल्ड लोन का कारोबार 8,800 करोड़ रुपये का है। उसके पहले के साल में यह 6,200 करोड़ रुपये था। इसमें 40 फीसदी की तेजी आई है। बैंक की योजना अगले एक साल में सभी शाखाओं में गोल्ड लोन का अलग से प्रकोष्ठ बनाने का है। फिलहाल यह ज्यादातर शाखाओं में हो भी चुका है।  

केनरा बैंक का गोल्ड लोन 3 साल में दोगुना हो गया है। 31 मार्च, 2020 को इसका पोर्टफोलियो 56,788 करोड़ रुपये था। इस साल जनवरी से जून तक 26 फीसदी की वृद्धि रही, उसके पहले के साल में 18 फीसदी की वृद्धि रही। जून, 2022 में एसबीआई का गोल्ड लोन कारोबार एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।  

बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने कहा कि उसका गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 4,967 करोड़ रुपये का है जो तेजी से बढ़ रहा है। आईसीआईसीआई बैंक ने कहा कि उसका पोर्टफोलियो 17,180 करोड़ रुपये का है। उसके पहले के साल में यह 22,000 करोड़ था। 

आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि गोल्ड बैकिंग डिपॉजिट का मूल्य 2020-21 में 1.43 लाख करोड़ रुपये था, जो 2021-22 में बढ़कर 1.96 लाख करोड़ रुपये हो गया। 2019 में गोल्ड लोन की कीमत 2912 अरब रुपये थी जो 2025 तक बढ़कर 6,275 अरब रुपये होने की उम्मीद है। 

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