हेल्थ इंश्योरेंस के दावे को नकारे जाने से कैसे बचें, जानिए इसके उपाय 

मुंबई- हेल्थ इंश्योरेंस के अगर कुछ बड़े फायदों को गिनाया जाये तो यह मेडिकल खर्च, अस्पताल में भर्ती होने की लागत, परामर्श लागत और एम्बुलेंस चार्जेस आदि को कवर कर पॉलिसीधारकों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। यह बीमित व्यक्ति को मानसिक शांति और सुरक्षा प्रदान करता है। पर यह भी सच है कि कई बार उनका क्लेम खारिज हो जाता है और इससे बीमा धारकों में अक्सर भ्रम और कड़वाहट का माहौल पैदा करता है। दावे को खारिज करने के कुछ बुनियादी कारण हैं और उन्हें जानना आवश्यक है। 

पॉलिसी अवधि – अधिकांश हेल्थ इंश्योरेंस के प्लान करार से बंधे होते हैं और उन्हें चालू रखने के लिए हर साल रिन्यू करने की आवश्यकता होती है। कई बार पॉलिसीधारकों को यह एहसास नहीं होता है कि उनका कॉन्ट्रैक्ट समाप्त हो गया है और यह तभी पता चलता है जब उनके दावे खारिज हो जाते हैं और यह कई लोगों के लिए एक बड़ा झटका होता है।  

यदि पॉलिसी की समय सीमा समाप्त हो गई है तो बीमा कंपनी दावे का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं है। इस तरह के खट्टे अनुभवों से बचने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि पॉलिसी रिन्यू हर हाल में किया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कवर बरकरार है। यदि आप पॉलिसी नवीनीकरण से चूक गए हैं तो आपको घबराने की आवश्यकता नहीं है।  

अधिकांश बीमाकर्ता 15 दिनों की छूट अवधि प्रदान करते हैं, जिसके दौरान आप पॉलिसी अवधि के दौरान प्राप्त लाभों को खोए बिना पॉलिसी को रिन्यू कर सकते हैं। हालांकि, इस ब्रेक-इन अवधि के दौरान आने वाले किसी भी दावे पर बीमाकर्ता द्वारा विचार नहीं किया जाएगा।

पहले से मौजूद बीमारियों या स्थितियों का खुलासा करना महत्वपूर्ण है। जैसे कि जिसने बीमा लिया है उसको ब्लड प्रेशर या दिल की कोई बीमारी है या नहीं। यदि किसी की पहले कोई बड़ी सर्जरी हुई है, उसका भी खुलासा करना होगा। बीमा रिन्यू करते समय किसी भी नई मेडिकल परिस्थिति या बीमारी का खुलासा करना भी जरूरी है।  

स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में क्लेम के दौरान परेशानी से बचने के लिए बीमाकर्ता के साथ स्वास्थ्य से संबंधित विवरण साझा करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। कुछ पूर्व-मौजूदा बीमारियों को हर हाल में नकार दिया जाता है और इस प्रकार इन विवरणों का खुलासा करना महत्वपूर्ण होता है।

प्रतीक्षा अवधि –
 हेल्थ इंश्योरेंस में प्रतीक्षा अवधि पॉलिसी में पूर्व-निर्धारित समय अवधि को बताती करती है जिसके दौरान उल्लिखित बीमारी या स्थिति के लिए क्लेम नहीं किया जा सकता है। प्रतीक्षा अवधि, पॉलिसी की शुरुआत के साथ शुरू होती है और बीमाकर्ता से बीमाकर्ता और बीमारी से बीमारी तक भिन्न होती है।  

बीमाकर्ता को उल्लिखित बीमारी के लिए भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होने से पहले उसे प्रतीक्षा अवधि की सेवा करनी होगी। पॉलिसीधारक को निर्दिष्ट बीमारियों के मद्देनजर प्रतीक्षा अवधि की अवधि के बारे में स्पष्टता प्राप्त करने के लिए पॉलिसी के वेटिंग पीरियड को अच्छी तरह से पढ़ना चाहिए। यदि प्रतीक्षा अवधि के दौरान दावा किया जाता है तो वह खारिज कर दिया जाएगा।

सभी बीमा पॉलिसियों में स्पष्ट रूप से इसका उल्लेख होता है कि इसमें क्या कवर और क्या नहीं और यदि पॉलिसीधारक किसी बीमारी के लिए दावा करता है, जो विशेष रूप से बहिष्कृत सूची का हिस्सा है, तो क्लेम खारिज कर दिया जाएगा। इसलिए, पॉलिसी खरीदते समय यह जानने के लिए कि पॉलिसी में क्या शामिल नहीं है, यह अच्छी तरह से देख लेना चाहिए कि इसमें कौन से कवर शामिल नहीं हैं।

समय के भीतर दावा न करना –
बीमा पॉलिसियों में एक निर्धारित समय-सीमा का उल्लेख होता है जिसके भीतर पॉलिसीधारक को क्लेम करना चाहिए। आमतौर पर पॉलिसी क्लेम फाइल करने के लिए डिस्चार्ज की तारीख से 60-90 दिनों की अवधि होती है। यदि इसके भीतर दावा फाइल नहीं किया जाता है तो यह खारिज का कारण बन जाता है। दावा प्रस्तुत करने में देरी का कारण अगर उचित हो तो बीमा कंपनी दावे को स्वीकार कर सकती है।

डॉक्युमेंट्स का सही न होना –

कई बार क्लेम, विशेष रूप से रीईंबर्समेंट के दावे गलत या अधूरे कागजात के कारण खारिज हो जाते हैं। इसलिए पॉलिसीधारक को किसी भी समस्या से बचने के लिए विधिवत भरे हुए क्लेम फॉर्म के साथ सभी मूल दस्तावेज, टेस्ट रिपोर्ट, डॉक्टर परामर्श पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने होते हैं।

आसान दावा पाने के लिए यह भी सलाह दी जाती है कि आप इलाज के लिए एक पसंदीदा नेटवर्क अस्पताल वाला चुनें, क्योंकि आप इन अस्पतालों में कैशलेस सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं और बेहतर रेट्स प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा आप कुछ चार्जेस पर छूट और अन्य गैर-बीमा आइटम्स के लाभ प्राप्त कर सकते हैं।  

अधिकांश बीमाकर्ताओं के पास उनके साथ लिस्टेड अस्पतालों का एक विस्तृत नेटवर्क होता है जो देश भर में फैला हुआ है और यह बिना किसी परेशानी के क्लेम के सेटलमेन्ट में मदद करता है। यहां तक कि अगर कोई पॉलिसीधारक रीईमबर्समेंट का क्लेम फाइल करता है, तो उसे दावा सेटलमेंट के लिए किसी भी बड़ी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा, बशर्ते कि आपने क्लेम फॉर्म को अच्छी तरह से भर दिया है और सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए हैं। जब तक पॉलिसी के तहत क्लेम स्वीकार्य है और वैध है, तब तक क्लेम का भुगतान किया जाएगा और पॉलिसीधारक को इस बारे में निश्चिंत रहना चाहिए। 

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