मंदी की चिंता के बीच कच्चा तेल तीन महीने में सबसे सस्ता 

मुंबई- दुनियाभर में आर्थिक मंदी आने की चिंताओं के बीच कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट आ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल तीन महीने में सबसे सस्ता होकर 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया।  

अन्य वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर में मजबूती, कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से सबसे बड़े तेल आयातक चीन में सख्त पाबंदियों और दुनियाभर में मांग घटने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। इससे अमेरिकी तेल मानक वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चा तेल गिरकर 96.09 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।  

इससे पहले अप्रैल की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से कम थीं। हालांकि, वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड एक फीसदी तेजी के साथ 100.5 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। इससे पहले रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद आपूर्ति बाधित होने से कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतें तेजी से बढ़ी थीं। इससे फरवरी के आखिरी सप्ताह में कच्चा तेल 90 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर पर पहुंच गया था।  

रॉयटर ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि एक महीने में मामूली उतार-चढ़ाव के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई यह गिरावट बाजार में व्याप्त चिंताओं की ओर इशारा कर रही है। महंगाई पर काबू पाने के लिए केंद्रीय बैंकों के ब्याज दरें बढ़ाने से भी बाजार प्रभावित हुआ है। ऐसे उपायों से अर्थव्यवस्था को रफ्तार तो मिलेगी, लेकिन आने वाली मंदी से कच्चे तेल की मांग प्रभावित होगी। 

आंकड़ों के मुताबिक, वैश्विक बाजार में एक सप्ताह में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 1.25 फीसदी घटी हैं। इस दौरान डब्ल्यूटीआई क्रूड में 2.91 फीसदी गिरा है। एक महीने में इनकी कीमतों में क्रमश: 15.58 फीसदी और 17.72 फीसदी की गिरावट आई है। 

कच्चे तेल की कीमतें घटने से रिफाइनरी कंपनियों के डीजल, पेट्रोल और विमान ईंधन (एटीएफ) के रिफाइनिंग (शोधन) मार्जिन में आई बड़ी गिरावट को देखते हुए अप्रत्याशित लाभ कर की समीक्षा करने की जरूरत है। ब्रोकरेज समूह सीएलएसए ने बुधवार को कहा कि जून में कच्चे तेल की कीमतें उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं। लेकिन, अब इनमें नरमी आने के कारण बीते दो सप्ताह में डीजल, पेट्रोल और एटीएफ के शोधन पर मिलने वाली मार्जिन में बड़ी गिरावट आई है। ऐसे में दो सप्ताह पहले लगाए गए अप्रत्याशित लाभ कर (विंडफॉल टैक्स) को जारी रखने की जरूरत पर सवाल खड़े होते हैं।  

सरकार ने एक जुलाई को कच्चे तेल के घरेलू उत्पादन पर 23,250 रुपये प्रति टन या 40 डॉलर प्रति बैरल का अप्रत्याशित लाभ कर लगाया था। उस समय वित्त मंत्रालय ने हर पखवाड़े इसकी समीक्षा की बात कही थी। 

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