महाराष्ट्र सरकार का संकट और बढ़ा, जिसे दूत बनाकर भेजा, वो भी शिंदे के साथ

मुंबई- महाराष्ट्र का राजनीतिक संकट हर गुजरते दिन के साथ दिलचस्प होता जा रहा है। मंगलवार को बगावत का बिगुल बजाने वाले एकनाथ शिंदे शिवसेना के बाल ठाकरे बनते दिख रहे हैं। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की एकनाथ शिंदे ने हालत पतली कर दी है। भला इससे बुरा क्या हो सकता है कि जिस शख्‍स को भरोसे के साथ दूत बनाकर भेजा जाए वह दुश्‍मन की सेना में शामिल हो जाए।  

हालांकि, उद्धव के मामले में कुछ यही हुआ है। सीएम उद्धव ठाकरे ने रवींद्र फाटक नाम के जिस दूत को एकनाथ को पार्टी के साथ एक करने के लिए भेजा था, वह खुद ही बागी खेमे में शामिल हो गया। यह साधारण बात नहीं है। इसने पार्टी पर उद्धव के नियंत्रण की पोल खोल दी है। कोई बाहरी शिवसेना का बाल ठाकरे बन गया। 

बाल ठाकरे की शिवसेना आज उनके बेटे के काबू से बाहर आ गई है। उसने उद्धव को अपना नेता मानने से साफ इनकार कर दिया है। आंकड़े और सूरते हाल तो फिलहाल कुछ ऐसा ही बयां कर रहे हैं। उद्धव ठाकरे के खेमे को एक के बाद एक झटका लग रहा है। उद्धव ठाकरे नंबर गेम में खुद फिसड्डी पड़ गए हैं। उनके खेमे में अभी सिर्फ 13 विधायक बचे हैं। उद्धव के करीबी भी पाला बदल रहे हैं।  

महाराष्ट्र के कम से कम 42 विधायक बागी शिवसेना विधायक एकनाथ शिंदे के साथ हो गए हैं। शिंदे ने मुख्‍यमंत्री का पानी उतारकर रख दिया है। हालात, यही रहे तो बेटे आदित्य और संजय राउत के साथ इक्‍का-दुक्‍का और विधायकों के साथ वो खड़े दिखेंगे। शिवसेना के इतिहास में इससे बड़ी बगावत देखने को नहीं मिली है। इसने शिवसेना को ही सिर के बल खड़ा कर दिया है।

शिंदे के मुकाबले पार्टी में उद्धव की हैसियत का गुरुवार को एक और नमूना देखने को मिला। विद्रोह को शांत करने के लिए उन्‍होंने अपने खासमखास रवींद्र फाटक को सूरत भेजा था। बगावत खत्‍म होने की बात तो दूर फाटक खुद बागी बन गए। फाटक एमएलए न होकर एमएलसी हैं। लेकिन, उनका भी बागी खेमे में पलायन कर जाना उद्धव के लिए बहुत बड़ी चोट है।  

छह विधायकों के अलावा शिवसेना के विधान पार्षद रवींद्र फाटक सूरत से बीजेपी शासित असम की राजधानी गुवाहाटी पहुंच गए। गुवाहाटी में ही शिवसेना के बागी विधायक डेरा डाले हुए हैं। फाटक उस दो-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे, जो शिंदे और दूसरे अन्य बागी विधायकों को मनाने और राजनीतिक संकट के हल के लिए सूरत के होटल में विचार-विमर्श के लिए वहां पहुंचे थे। 


इन बागी विधायकों के आगे उद्धव ठाकरे ने सारे हथियार डाल दिए हैं। यहां तक शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन वाली महा विकास अघाड़ी सरकार से बाहर आने के संकेत भी दे दिए हैं। उद्धव ठाकरे ने सीएम आवास छोड़ दिया है। वह मातोश्री पहुंच गए हैं। हालांकि, यह बगावत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है।

फिलहाल शिंदे शिवसेना के 37 बागी और नौ निर्दलीय विधायकों के साथ गुवाहाटी के एक होटल में डेरा डाले हुए हैं। यह शिवसेना में नए बाल ठाकरे के उदय का शंखनाद है।  

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