चीन की अलीबाबा ने फर्जी कागजातों पर भारत में बनाई कंपनी  

मुंबई। चीन की टेक कंपनी अलीबाबा की भारतीय कंपनी अलीबाबा क्लाउड कानूनी पचड़े में फंस गई है। आरोप है कि इसने फर्जी कागजातों के आधार पर 5 साल पहले कंपनी बनाई। साथ ही पहले भारतीय मूल के व्यक्ति को सामने रखा और बाद में इसका इस्तीफा दिलवाकर पूरा मालिकाना हक चीनी मूल के व्यक्ति को ट्रांसफर कर दिया गया।  

मुंबई पुलिस और कॉरपोरेट मंत्रालय ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। मुंबई पुलिस को इस संबंध में एक शिकायत मिली है। इसमें कंपनी के कुछ भागीदार और अन्य लोग भी हैं। जांच में पता चला है कि मार्च, 2017 में अलीबाबा क्लाउड को शुरू किया गया था। 

यह भी पता चला है कि कंपनी द्वारा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) को जुलाई, 2021 में दी गईं तमाम जानकारियां भी गलत हैं। इसमें कंपनी ने मुंबई में जो कार्यालय का पता बताया है, वहां कोई ऑफिस नहीं है। अलीबाबा क्लाउड उन 700 कंपनियों में है, जिसमें चीनी मूल के नागरिक हैं और केंद्रीय गृह मंत्रालय की सूचना पर जांच चल रही है। 

अलीबाबा क्लाउड के बारे में ऐसी आशंका है कि यह पैसों को बाहर भेजने के लिए काम करती है। ऐसे में इसके सही लाभान्वित पक्ष की भी जांच हो रही है कि क्या इसमें कोई राजनीतिक व्यक्ति है या किसी और का कोई संबंध है। कॉरपोरेट मंत्रालय इस तरह की कंपनियों के लिए दो तरह से जांच करता है। इसमें पहली जांच कागजातों के संबंध में और दूसरी कोई संदेहास्पद अनियमितता पाई जाती है तो आरओसी को पुलिस में शिकायत दर्ज करानी होगी। 

अलीबाबा क्लाउड की जांच में यह सामने आया है कि चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) ने कंपनी को 25 मार्च, 2017 को बनाने में मदद की थी। इसमें तीन लोग शामिल किए गए जिसमें पूजा चेरियन के पास 98 फीसदी हिस्सेदारी, टिप पाक तुंग जान्सन और तिमोथी स्टेनर्ट के पास 1-1 फीसदी हिस्सेदारी है। हालांकि बाद में पूजा इसमें से निकल गईं। 

सीए आनंद किदंबी ने पिछले महीने सुप्रीमकोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। इसकी सुनवाई जुलाई के दूसरे हफ्ते में हो सकती है। कॉरपोरेट मंत्रालय का दावा है कि सीए ने ही कंपनी को फर्जी कागजात के साथ बनाने में मदद की और आरओसी में पंजीकृत कराया। बाद में आरओसी को धोखा देकर कंपनी को चीनी मूल के व्यक्ति को ट्रांसफर कर दिया गया। 

Leave a Reply

Your email address will not be published.