आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एसेट एलोकेटर फंड (एफओएफ) के जरिए से बाजार की अस्थिरता को आसानी से निपटिए  

मुंबई- किसी आम आदमी के लिए सही समय पर सही एसेट क्लास में निवेश करना एक चुनौतीपूर्ण काम होता है। निवेशक अक्सर यह सोचकर हैरान रह जाते हैं कि निवेश का निर्णय लेते समय किसी विशेष असेट क्लास के लिए मूल्यांकन सस्ता है या महंगा। एक और चुनौती यह भी आती है कि किसी विशेष असेट क्लास में कब प्रवेश करना और बाहर निकलना है। साथ ही, जब फिर से संतुलन (rebalancing) की बात आती है, तो यहां हर एक्शन पर टैक्स लगता है, चाहे वह छोटी या लंबी अवधि की हो। वास्तव में, जब भी आवश्यक हो, सही असेट क्लास में निवेश करना और उसके बाद फिर से संतुलन स्थापित करना कोई आसान काम नहीं है। यहीं से आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एसेट एलोकेशन फंड (एफओएफ) आता है। डेटा से पता चलता है कि असेट क्लासों (इक्विटी, डेट और गोल्ड) के बीच योजना के टैक्टिकल अलोकेशन ने लंबे समय में एक सहज निवेश अनुभव सुनिश्चित करने में सहायता की है। 

यदि किसी निवेशक ने मार्च 2010 में एकमुश्त 10 लाख रुपये का निवेश किया होगा तो वह आज 41.41 लाख रुपये के बराबर होगा। इसी समय सीमा के दौरान, निफ्टी 50 में यही निवेश 39.03 लाख रुपये होगा। इस दौरान स्कीम की एवरेज इक्विटी महज 43 फीसदी थी। इससे पता चलता है कि कम इक्विटी आवंटन के बावजूद, लंबी अवधि में फंड निफ्टी इंडेक्स को भी मात देने में कामयाब रहा है। रिटर्न शुद्ध रूप से रिटर्न हैं। अवधि : 1 मार्च 2010 से 31 मई 2022 तक। 

इस योजना में फंड ऑफ फंड स्ट्रक्चर है और मुख्य रूप से आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल के इन-हाउस वैल्यूएशन मॉडल के आधार पर इक्विटी और डेट म्यूचुअल फंड योजनाओं के बीच एलोकेट करती है। इस स्कीम में सोने में भी आवंटन है। इस फंड की एक खास बात यह है कि वैल्यूऐशन मॉडल के आधार पर इक्विटी और डेट दोनों में आवंटन 0-100% तक हो सकता है। यह मॉडल बाजार में गिरावट आने कम पर खरीदो और ज्यादा पर बेचो (buy low, sell high) के सिद्धांत का अनुसरण कर इक्विटी एक्सपोजर बढ़ाता रहता है। 

एक उदाहरण : महामारी की शुरुआत के दौरान जब मार्च 2020 में बाजारों में तेजी से सुधार हुआ, तो स्कीम का इक्विटी आवंटन 83% था। इसके बाद जैसे-जैसे बाजारों में सुधार हुआ और दिसंबर 2020 तक इक्विटी आवंटन 45% तक कम हो गया था। अब, मई 2022 तक, इक्विटी आवंटन 33% है। साथ ही डेटा से यह भी पता चलता है कि इस योजना ने बाजार की विषम परिस्थितियों में भी अच्छा प्रदर्शन किया है। जनवरी 2015 के अंत से अप्रैल 2017 की शुरुआत तक सेंसेक्स 30,000 के आसपास मंडरा रहा था। जबकि बाजार फ्लैट था तो इस बीच इस स्कीम ने 10.8 फीसदी रिटर्न दिया। विशेष रूप से, गिरते बाजार में यह स्कीम गिरावट को लिमिट करने में सफल रही है। अक्टूबर 2021 के पीक से, जब से निफ्टी और सेंसेक्स 30 दोनों लगभग 15% नीचे हैं, इस स्कीम में बमुश्किल से 1.1% सुधार हुआ है। 

अगर किसी को 10,000 रुपये का मासिक एसआईपी शुरू करना है तो एक दशक में निवेश राशि 12 लाख होगी और निवेश का वर्तमान मूल्य 22.3 लाख होगा जो 13.3% की सीएजीआर के बराबर होगा। अगर किसी को कम समय के लिए जैसे कि 3, 5 या 7 साल के लिए निवेश रूप में देखा जाए तो यह स्कीम 10% से अधिक रिटर्न देने में कामयाब रही है जो बेंचमार्क यानी क्रिसिल हाइब्रिड 50+50 – मॉडरेट इंडेक्स के या तो बराबर है या इसके आसपास है। इससे पता चलता है कि निवेश के एकमुश्त या एसआईपी मोड के बावजूद इस स्कीम ने बहुत अच्छा जोखिम समायोजित रिटर्न दिया है। 

बाजार की अस्थिरता (Volatility) के कारण 

ऐसा लगता है कि विश्व के साथ-साथ ही भारतीय इक्विटी बाजार भी आने वाले समय में उतार चढ़ाव भरा रहने वाला है। इनमें से कुछ घटनाक्रमों से बाजार की परिस्थितियों को मुश्किल में डाल सकते हैं। 

1) ग्लोबल सेंट्रल बैंकों द्वारा आक्रामक मौद्रिक सख्ती (Aggressive monetary tightening) और ब्याज दरों में बढ़ोतरी 

2) कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें 

3) सप्लाई की चिंताओं के कारण विश्व स्तर पर स्थिर मुद्रास्फीति 

4) चल रहे रूस-यूक्रेन संघर्ष के बारे में अनिश्चितता 

ये सभी वे फ़ैक्टर्स हैं जो बाजार में काफी उतार-चढ़ाव का कारण बन सकते हैं। ऐसे समय में निवेश करने के लिए एसेट एलोकेशन का पालन करना पड़ता है, जिसमें आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एसेट एलोकेटर फंड माहिर है। ऐसे में वे निवेशक जो लंबे समय तक निवेश में बने रहने के लिए तैयार हैं, उन्हें निवेश का अच्छा अनुभव प्राप्त होने की संभावना है।

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