वसूली एजेंटों का गलत व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा- आरबीआई गवर्नर 

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि कर्ज वसूली एजेंटों का गलत व्यवहार किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ये एजेंट गलत समय पर ग्राहकों को फोन करते हैं और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं। यह एक कठोर रवैया है। जबरन वसूली करने वालों के खिलाफ सख्त नियम लाया जाएगा।  

केंद्रीय बैंक जल्द ही डिजिटल एप के जरिये सुरक्षित उधारी सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करेगा। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब एजेंटों द्वारा कठोर वसूली परंपरा के कारण कई लोगों द्वारा आत्महत्या करने की बातें सामने आई हैं। जल्द ही इस बारे में चर्चा पत्र भी लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि वित्तीय क्षेत्र में मौजूद बड़ी टेक कंपनियों के चलते ज्यादा कर्ज जैसी व्यवस्थागत चिंताएं खड़ी होती हैं। वे मुंबई में एक समाचार पत्र के आयोजन में बोल रहे थे। 

उन्होंने कहा कि आरबीआई की ओर से इस तरह के मामलों में कदम उठाने का आश्वासन दिया गया है। ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और हम गंभीरता से इस पर ध्यान दे रहे हैं। इस तरह की ज्यादातर घटनाएं अनियमित संस्थाओं द्वारा की जाती हैं। 

गवर्नर ने कहा कि ब्लॉकचेन कंपनियां अलग किस्म की समस्याएं पैदा करती हैं। उन पर नियंत्रण रखने के लिए वैश्विक स्तर पर मिलकर कार्रवाई करने की जरूरत है। ऐसा इसलिए क्योंकि ब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म पर कोई एक देश का रेगुलेटर काम नहीं कर सकता है। 

शक्तिकांत दास ने कहा कि आरबीआई कभी भी ब्याज दरों को बढ़ाने में पीछे नहीं रहा है। मैं इस विचार से सहमत नहीं हूं कि आरबीआई ब्याज दरों को बढ़ाने में पीछे रह गया। उन्होंने यह सवाल भी किया कि अगर हम ब्याज दरें पहले बढ़ा भी देते तो रूस-यूक्रेन के चलते जो महंगाई बढ़ी है, वो नहीं बढ़ती? इसके बाद भी महंगाई 7 फीसदी से ऊपर ही रहती। हम तीन चार महीने पहले महंगाई से लड़ने के लिए कदम नहीं उठा सकते थे। हम अपने हर फैसले पर कायम हैं।  

आरबीआई की एमपीसी ने महंगाई के बीच 35 दिन में दो बार में रेपो दर को 0.90 फीसदी बढ़ाकर 4.9 फीसदी कर दिया था। दास ने कहा कि मार्च में आरबीआई ने यह महसूस किया कि आर्थिक गतिविधियां कोरोना से पहले के स्तर से ऊपर आ चुकी हैं और महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए अब ध्यान केंद्रित करना जरूरी है। हालांकि तब भी अचानक से बहुत ज्यादा दरों में वृद्धि नहीं की जा सकती थी।  

उन्होंने कहा कि महंगाई का पहले का अनुमान कच्चे तेल के 80 डॉलर प्रति बैरल के आधार पर था, पर रूस और यूक्रेन की लड़ाई से कच्चा तेल का भाव इसके ऊपर चला गया। इसने पूरे परिदृश्य को बदल दिया। गवर्नर ने कहा कि कोरोना के समय मैद्रिक नीति समिति ने महंगाई को सहन करने का जानबूझ कर फैसला इसलिए किया क्योंकि हालात वैसे थे। नहीं तो इसके गंभीर परिणाम होते। उस समय अगर रेपो दर बढ़ाई जाती तो आर्थिक नुकसान ज्यादा होता।  

आरबीआई जरूरत के आधार पर फैसला करता है और कुछ ऐसे कारक भी होते हैं जिनकी वजह से ज्यादा समय लगता है और यह हमारे भी नियंत्रण से बाहर होता है। केंद्रीय बैंक का फैसला आर्थिक विकास की जरूरतों के अनुरूप था। दास ने कहा कि चालू वित्तवर्ष में उधारी में वृद्धि 12 फीसदी के आस-पास रह सकती है। पिछले साल यह 5-6 फीसदी के बीच थी। यानी इसमें 100 फीसदी की तेजी आने की उम्मीद है। 

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