चावल निर्यात पर नियंत्रण की कोई योजना नहीं 

मुंबई- दुनिया में चावल के सबसे बड़ा निर्यातक देश भारत ने कहा है कि चावल के निर्यात पर नियंत्रण की उसकी कोई योजना नहीं है। खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने सोमवार को कहा कि हमारे पास चावल का भंडारण काफी ज्यादा है और इसलिए इसके निर्यात पर हम कुछ नहीं सोच रहे हैं। उनके इस फैसले को उन देशों के लिए राहत माना जा रहा है, जो आयात पर निर्भर हैं और बढ़ती कीमत से जूझ रहे हैं।  

भारत में अभी मानसून शुरू हो रहा है और धान की खेती मुख्य रूप से इसी समय की जाती है। ऐसे में भारत के पास चावल का आगे भी भरपूर भंडारण रहने वाला है। 2021 में देश का चावल निर्यात 2.14 करोड़ टन था जो दुनिया के चार बड़े अनाज निर्यातक देशों थाईलैंड, वियतनाम, पाकिस्तान और संयुक्त राष्ट्र के निर्यात से ज्यादा था। 

चीन के बाद भारत चावल के ग्राहकों के मामलेम में दूसरे नंबर पर है। वैश्विक चावल कारोबार में इसकी बाजार हिस्सेदारी 40 फीसदी से ज्यादा है। घरेलू स्तर पर चावल के ज्यादा भंडार और कम कीमतों से भारत पिछले दो वर्षों से कम भाव पर दूसरे देशों को चावल दे रहा है। इससे बढ़ी कीमतों से जूझ रहे गरीब देशों को मदद मिली। 

भारत 150 से ज्यादा देशों में चावल का निर्यात करता है। इसलिए निर्यात पर कोई भी प्रतिबंध खाद्य कीमतों में इजाफा कर सकता है। थाईलैंड और वियतनाम जैसे देश इसका फायदा उठाकर कीमतें ज्यादा कर सकते हैं। इन देशों में चावल की कीमतें पहले से ही भारत की तुलना में 30 फीसदी ज्यादा हैं। 2007 में जब चावल के निर्यात पर भारत ने रोक लगाई तो इसका असर यह हुआ कि वैश्विक देशों में भाव आसमान छूने लगे। 

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