साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने से बचने के लिए इन बातों पर दें ध्यान

मुंबई- यूँ तो कोविड महामारी की शुरुआत से पहले ही साइबर क्राइम के केसेस बढ़ रहे थे, लेकिन महामारी के बाद जब से डिजिटल लेनदेन बढ़ा तब से मानों इसमें बाढ़ जैसी आ गई हो।  

साइबर धोखाधड़ी के सबसे आम मामलों में पैसे और/या पहचान की चोरी, ईमेल स्पूफिंग, साइबरस्टॉकिंग, वायरस अटैक, सेवा से इनकार (डिनायल ऑफ़ सर्विस) और अनधिकृत ऑनलाइन लेनदेन जैसे कृत्य शामिल हैं। वास्तव में, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार, भारत में साइबर अपराधों में 2016 से 2020 के बीच 306% की वृद्धि हुई है और महामारी के वर्ष में प्रतिदिन औसतन 136 साइबर अपराध के मामले सामने आए हैं।  

इससे भी ज्यादा चौकाने वाली बात है कि प्रत्येक वर्ष दर्ज किए गए लगभग 66% मामले साइबर अपराधों की जांच इसलिए नहीं हो पाई कि इसके मामले अचानक बढ़ गये थे। ऐसे में साइबर अपराधों से खुद को बचाने की जिम्मेदारी खुद आम लोगों पर आ पड़ी है।

आइए हम उन महत्वपूर्ण एहतियाती कदम पर नजर डालें, जिनकी मदद से साइबर अपराध की गतिविधियों का शिकार होने से बचा या उसकी संभावना को कम किया जा सकता है। यह शायद साइबर अपराध की गतिविधियों का शिकार होने से बचने की सबसे अच्छी तरकीब है कि आप उन सभी कंप्यूटिंग उपकरणों को नवीनतम एंटी-वायरस और एंटी-मैलवेयर सॉफ़्टवेयर से लैस रखें जो इंटरनेट से जुड़े हैं।  

हालाँकि अधिकांश डिवाइस मुफ्त सॉफ्टवेयर के साथ आते हैं, पर वे अक्सर सीमित अवधि के ही कारगर साबित होते हैं। उनकी वैधता समाप्त होने से पहले उन्हें अपडेट किया जाना चाहिए। यूँ तो बाजार में न जाने कितने विकल्प उपलब्ध हैं, पर ये सुनिश्चित करें कि आपके द्वारा चुने गए सॉफ़्टवेयर सलूशन उनके द्वारा प्रदान की जाने वाली सुरक्षा के लिए विश्वसनीय हैं और आपके एप्लिकेशन (कमर्शियल या पर्सनल उपयोग) के लिए फिट हैं। 

अंत में यह देखते हुए कि साइबर अपराधी डिवाइस के ऑपरेटिंग सिस्टम में किसी भी तरह से उसमें एक्सेस बना लेते हैं, आपको थोड़ा अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए और इसके लिए हर सप्ताह कम से कम एक बार सभी डिवाइस को स्कैन और अपडेट कर लेना चाहिए।

यह भी अत्यंत महत्वपूर्ण है कि कई वेबसाइटों के लिए क्रेडेंशियल्स को रिफ्रेश करते समय सभी डिवाइस में पासवर्ड न दोहराएं। सबसे अच्छी सलाह यह दी जाती है कि साइबर अपराधियों को आपके खातों या कंप्यूटिंग उपकरणों तक पहुंच से रोकने के लिए आप नियमित रूप से अपने पासवर्ड बदलें और मुश्किल से अनुमान लगाने वाले पासवर्ड का ही उपयोग करें।  

पासवर्ड चुनते समय हमेशा अक्षरों, संख्याओं और प्रतीकों (symbols) के संयोजन का उपयोग करने का सुझाव दिया जाता है, जिसमें सभी रिकॉर्ड एक्सेल वर्कशीट या डिवाइस के नोटपैड के बजाय ऑफ़लाइन बनाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, यह भी सुनिश्चित करें कि मोबाइल उपकरणों को एडवांस लॉगिन फीचर्स से सुरक्षित किया गया है जैसे कि जहां भी संभव हो चेहरा पहचान (face recognition) का उपयोग करें। इसके अलावा अपरिचितों या छोटे बच्चों को यथासंभव एक्सेस से रोकें।

अधिकतर साइबर अपराधी या हैकर्स आमतौर पर सार्वजनिक वाई-फाई सिस्टम से जुड़े उपकरणों या असुरक्षित/अज्ञात वेबसाइटों पर विजिट करने वाले व्यक्तियों को टारगेट करते हैं। इसलिए यह सलाह दी जाती है कि आप हमेशा वेबसाइट पर जाने से पहले उसकी सिक्योरिटी को वेरीफाई करें, खासकर जब ईमेल या एसएमएस लिंक के माध्यम से उन पर रीडायरेक्ट किया जा रहा हो। 

मोबाइल डिवाइस के मामले में, कुछ लक्षण जैसे कि अनजान एप्लिकेशन आटोमेटिक रूप से डाउनलोड होना, बैटरी अधिक डिस्चार्ज होना या डाटा ज्यादा यूज होना आदि इस बात के संकेत हैं कि डिवाइस से छेड़छाड़ की गई है। ऐसे मामलों में, ऐसे उपकरणों से तुरंत लॉग ऑफ करने और मोबाइल सिक्योरिटी एक्सपर्ट के माध्यम से इसकी जांच कराने की सलाह दी जाती है।

ऐसी स्थिति में जहां आप आश्वस्त हों कि आप साइबर अपराध का शिकार हो चुके हैं, तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन 155260 या 1930 पर इसकी रिपोर्ट करें, जिसे साइबर धोखाधड़ी के कारण होने वाले वित्तीय नुकसान को रोकने के लिए भारत सरकार द्वारा संचालित किया गया है. नहीं तो आप राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल ( www.cybercrime.gov.in) पर भी रिपोर्ट कर सकते हैं और मोबाइल डिवाइस के मामले में, डिवाइस को फ़ैक्टरी रीसेट का ऑप्शन अपनाएं। 

आपके द्वारा उठाये गए ये कदम धोखाधड़ी होने की स्थिति में डेटा, सूचना या वित्तीय नुकसान को कम कर सकते हैं और अधिकारियों को अपराधियों की धर पकड़ करने में आसानी होगी। ऊपर बताये गए कदम बुनियादी सावधानियां हैं जो सभी व्यक्तियों को लेनी चाहिए। पर साइबर हमले के बाद होने वाले सभी खर्चों और देनदारियों से खुद को बचाने के लिए साइबर इंश्योरेंस ले लेना सबसे सही है। 

कोई भी साइबर इंश्योरेंस स्कीम एक रैंसमवेयर हमले या साइबर जबरन वसूली, आईटी चोरी या हानि, ई-मेल स्पूफिंग और फिशिंग, नुकसान और पहचान की चोरी से संबंधित रक्षा और अभियोजन लागत से संबंधित खर्चों और वित्तीय नुकसान को कवर करती है। इसके अलावा साइबर स्टॉकिंग, मैलवेयर के एंट्री से क्षतिग्रस्त डेटा या कंप्यूटर प्रोग्राम को पुनः प्राप्त करने या रीइंस्टाल करने की लागत भी कवर हो जाती है।  

यह परामर्श सेवाओं पर होने वाले खर्चों के लिए भी कवरेज प्रदान करता है जो किसी साइबर हमले के शिकार होने के बाद तनाव के परिणामस्वरूप विकसित हो सकते हैं। गोपनीयता भंग और डेटा उल्लंघन के लिए थर्ड पार्टी के खिलाफ हर्जाने का क्लेम और कोर्ट के सम्मन में भाग लेने के लिए आने जाने का खर्च भी पॉलिसी के तहत कवर किया गया है।

आज के डिजिटल क्रांति के दौर में सोफिस्टिकेटेड साइबर क्राइम में होना तय है और इसलिए यह आवश्यक हो जाता है कि हम इससे होने वाले संभावित नुकसान से सुरक्षित रहें, इसके लिए अधिक कठोर प्रक्रियाओं और प्रोटोकॉल का पालन करने की आवश्यकता है।  

साइबर इंश्योरेंस इस महत्वपूर्ण अंतर को भरने और रिस्क को समाप्त करने का एक महत्वपूर्ण टूल साबित होने वाला है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि आप बिना किसी चिंता के ऑनलाइन लेन-देन, ब्राउज़ और सर्फ कर सकें और सुरक्षित रहें। 

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