चार बैंकों के कर्ज महंगे, आईसीआईसीआई, पीएनबी, बीओबी और बीओआई ने बढ़ाया ब्याज 

मुंबई। आरबीआई द्वारा रेपो दर को बढ़ाने के एक दिन बाद ही इसका असर दिखने लगा है। चार बड़े बैंकों ने कर्ज को महंगा कर दिया है। आईसीआईसीआई बैंक ने अपनी वेबसाइट पर कहा कि इसकी बाहरी बेंचमार्क उधारी दर (ईबीएलआर) अब 8.60 फीसदी होगी। इसे 8 जून से लागू कर दिया है।  

बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा कि उसके जो भी कर्ज रेपो रेट से जुड़े हैं, उनकी दर बढ़ा दी गई है। इसमें खुदरा कर्ज की दर 7.40 फीसदी होगी। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) का रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (आरएलएलआर) अब बढ़कर 7.40 फीसदी हो गया है। दोनों की दरें 9 जून से लागू हो गई हैं। 

बैंक ऑफ इंडिया ने भी अपना कर्ज महंगा कर दिया है। इसने कहा कि इसका आरबीएलआर अब 7.75 फीसदी होगा, जो 8 जून से लागू हो गया है। एचडीएफसी लिमिटेड ने कहा कि उसने भी आधा फीसदी की बढ़ोतरी दरों में की है और अब उसकी नई दर 7.55 फीसदी हो गई है।  

दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के रेपो दर से बैंकों की ब्याज दर करीबन ढाई से साढ़े तीन फीसदी ज्यादा होती है। रेपो दर का मतलब यह है कि जिस दर पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। ऐसे में बैंक उससे थोड़ा ज्यादा ब्याज बढ़ाकर ग्राहक को कर्ज देते हैं। जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में कई सारे बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां अपने कर्ज को महंगा कर सकती हैं।  

आरबीआई ने पिछले 36 दिनों में 0.90 फीसदी रेपो दर बढ़ाया है। इस आधार पर बैंक करीबन एक फीसदी तक कर्ज को महंगा कर सकते हैं। मई में जब आरबीआई ने 0.40 फीसदी कर्ज बढ़ाया था, तब उसी अनुपात में बैंकों ने ब्याज बढ़ाया था। आरबीआई द्वारा दो बार दरों को बढ़ाए जाने के बाद अब यह माना जा रहा है कि लोन का ब्याज कम से कम 7.6 फीसदी होगा। इससे नीचे कर्ज मिलना मुश्किल है।  

पिछले दो सालों में लोन की ब्याज दरें ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर पहुंच गई थीं, जो 6.4 फीसदी थीं। हालांकि अब सस्ते ब्याज का दौर खत्म हो रहा है। जिस तरह से अनुमान है, ऐसे में दिसंबर तक आपको 3 बार और ब्याज दरों के इजाफा का सामना करना होगा। ऐसे में मई से दिसंबर के बीच एक लाख रुपये पर कम से कम 100 रुपये का मासिक इजाफा होगा।  

आरबीआई की दो बार दरें बढ़ाने का असर यह है कि एक लाख रुपये पर कम से कम 55 रुपये मासिक किस्त बढ़ेगी। मई में आरबीआई ने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) आधा फीसदी बढ़ाया था। इससे जमा पर मिलने वाले ब्याज में इजाफा हो गया था। पर जून की समीक्षा में केंद्रीय बैंक ने केवल रेपो दर को बढ़ाया है, इसलिए जमा पर ज्यादा ब्याज नहीं मिलेगा। सीआरआर को जस का तस 4.5 फीसदी पर ही रखा गया है। 

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