ब्याज दरें बढ़ने से मकानों की बिक्री पर होगा असर- इंडस्ट्री 

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक के रेपो दर बढ़ाने के फैसले का सीधा असर मकानों की बिक्री पर हो सकता है। क्योंकि होम लोन काफी ज्यादा महंगे हो जाएंगे इससे लोग घर खरीदने के निर्णय को टाल सकते हैं। इसका ज्यादा असर सस्ते और मध्यम आय वाले घर पर होगा।  

रियल्टी उद्योग के मुताबिक, बुधवार को ब्याज दरों में आधा फीसदी और उससे पहले मई में 0.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। इससे होम लोन की ब्याज दर 90 फीसदी बढ़ जाएगी जिससे लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। प्रॉपर्टी सलाहकार एनारॉक नाइट फ्रैंक, जेएलएल और अन्य ने आरबीआई के इस फैसले से उम्मीद जताई की महंगाई नियंत्रण में आएगी पर इससे रियल्टी सेक्टर प्रभावित होगा। 

एनारॉक चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि वैसे ब्याज दरें 2008 में वैश्विक वित्तीय संकट के बाद से काफी कम हैं। उस समय ब्याज दर 12 फीसदी हुआ करती थी, जो अब 7 फीसदी के आस-पास है। उनके मुताबिक, अभी भी हाउसिंग क्षेत्र में निवेश के रूप में कोई नहीं आता है, जो भी आते हैं वे रहने के लिए घर खरीदते हैं।  

कोलियर्स इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश नायर ने कहा कि आरबीआई के फैसले का बोझ बैंक धीरे-धीरे ग्राहकों पर डालना शुरू करेंगे। इसलिए घर खरीदनेवालों के लिए अभी भी मौका है कि वे सस्ती ब्याज दरों पर इसका फायदा लें। नाइट फ्रैंक के चेयरमैन शिशिर बैजल ने कहा कि होम लोन महंगे होने, प्रॉपर्टी को विकसित करने की लागत और कीमतों के दबाव का असर खरीदारों के सेंटीमेंट को प्रभावित करेगा। 

एसबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मार्च, 2023 तक आरबीआई दरों को बढ़ाकर कोरोना के पहले के स्तर पर कर सकता है। यह 5.75 तक जा सकती है। इसके मुताबिक, अगस्त में 5.25 फीसदी और अक्तूबर में बढ़कर 5.5 फीसदी हो सकती है। इस तरह से एक साल में 1.75 फीसदी लोन महंगा हो जाएगा। इससे 10 साल की यील्ड 7.5 फीसदी के ऊपर जा सकती है।  

इसके साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि  खरीफ की फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने से महंगाई में 15 से 20 बीपीएस का इजाफा होगा। एचडीएफसी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरुआ ने कहा कि केंद्रीय बैंक की चिंता महंगाई को लेकर थी और उसी के मुताबिक फैसला आया है। साल के अंत तक रेपो रेट बढ़कर 6 फीसदी तक जा सकता है। 

इंडिया रेटिंग के मुख्य अर्थशास्त्री सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि महंगाई और विकास के बीच संतुलन बनाने के लिए यह कदम जरूरी था। हालांकि बैंकिंग सिस्टम में अभी भी तरलता काफी है। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि विकास को समाहित किया जाना है, लेकिन महंगाई को लेकर तुंरत कदम उठाए जाने की जरूरत है। ऐसे में दिसंबर तक रेपो रेट 5.75 फीसदी तक जा सकता है। 

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