घटती बचत, महंगा होता लोन, जानिए क्या है निपटने का तरीका 

मुंबई- मई में आरबीआई द्वारा लोन की ब्याज दरों में 40 बीपीएस का इजाफा किए जाने के बाद अब एक बार फिर बुधवार को इसे बढ़ाने की तैयारी है। उधर, बचत पर लगातार कैंची भी चल रही है। पीएफ पर घटी ब्याज दर और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बढ़ाई जा रही लोन की ब्याज दरों ने लोगों को जबरदस्त झटका दिया है। ऐसे में लोन की किस्त कम हो और अच्छी ब्याज मिले, इसकी योजना बनाने की जरूरत है। लोन की महंगी किस्त से निपटने का सबसे कारगर तरीका यह है कि आप उन संस्थानों में ब्याज दरों को जांचें, जहां कम दर पर आपको लोन मिल रहा है।  

दरअसल अभी तक जो ब्याज दरें बढ़ रही हैं, उसका ज्यादा असर पुराने लोन लेने वाले ग्राहकों पर हो रहा है। क्योंकि बैंकों या कंपनियों को यह पता है कि पुराना ग्राहक उनके यहां से कहीं और नहीं जाएगा। जबकि नए ग्राहक को वे कम ब्याज पर लोन दे रहे हैं। ऐसे में तरीका यही है कि आप एक नया ग्राहक बनकर अपने लोन को किसी और संस्थान में ट्रांसफर करा लें। पहले तो यह कोशिश करें कि आप लोन लेने के पहले दो साल तक जितना भी संभव हो, पुनर्भुगतान करें। ऐसा इसलिए क्योंकि बैंक या लोन देने वाली कंपनियां पहले दो साल में आपके लोन का ब्याज ही वसूलती हैं।  

ऐसे में अगर आप कुछ पैसा भर देते हैं तो किस्त में आपका मूलधन ज्यादा कटेगा और ब्याज कम कटेगा। इससे आपकी बहुत बड़ी बचत होगी। दूसरी ओर पीएफ पर मिल रही कम ब्याज दरों का भी आप चाहें तो हल निकाल सकते हैं। आप पीएफ के कुछ पैसों को निकाल कर ऐसी जगह पर लगा दें जहां 8.1 फीसदी से ज्यादा ब्याज आपकी जमा पर मिले।  

अगस्त से आपका कर्ज और महंगा होगा। मई में 40 बीपीएस और जून में 40-50 बीपीएस दरें बढ़ने की संभावना के बीच यह भी संभव है कि अगस्त में आरबीआई रेपो रेट में 25 बीपीएस की बढ़त कर सकता है। इस साल के अंत तक केंद्रीय बैंक रेपो रेट को कोरोना के पहले के स्तर यानी 5.15 फीसदी पर ले जाएगा। इसका मतलब कि 1.15 फीसदी ज्यादा ब्याज के लिए आपको तैयार रहना होगा।  

आरबीआई के मई में रेपो दर बढ़ाने के बाद अभी तक सभी बैंकों ने 2 से 3 बार अपने कर्ज महंगे किए हैं, जबकि उसकी तुलना में जमा के ब्याज पर मामूली बढ़ोतरी की गई है। अभी भी कुछ ही बैंकों ने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में बढ़त का फायदा ग्राहकों को दिया है। ऐसे में कम जमा के ब्याज से छुटकारा पाने का आसान तरीका यह है कि आप किसी ऐसे विकल्प को तलाशें, जो इससे ज्यादा ब्याज दे। 

अभी भी कई कॉरपोरेट अपनी जमा पर ज्यादा ब्याज दे रहे हैं। खासकर कुछ ऐसी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) हैं जो इस समय करीबन 8 फीसदी का ब्याज दे रही हैं। ऐसे में बैंकों की एफडी से ज्यादा बेहतर है कि आप इस तरह का रास्ता अपनाएं। क्योंकि अगर महंगाई की दर से 3-4 फीसदी ज्यादा ब्याज नहीं मिलता है तो फिर आप जिसे बचत समझ रहे हैं, वह घाटा वाला सौदा है।  

अगर आपको पैसे की जरूरत लंबे समय तक के लिए नहीं तो इस समय सबसे अच्छा ब्याज पीएफ पर मिल रहा है। हालांकि इसमें 0.40 फीसदी की जरूर कटौती की गई है, फिर भी यह 8.1 फीसदी के साथ सबसे बेहतर है। पर इसमें लॉक इन अवधि एक ऐसा मामला है, जो आपको परेशान कर सकता है। क्योंकि लंबे समय के लिए इसमें आपको पैसा जमा करना होता है।  

अगर आप पैसा जमा करना चाहते हैं तो दो-तीन महीने के लिए ही अभी जमा करें। क्योंकि अगस्त में एक बार और सीआरआर बढ़ सकता है। ऐसे में मई की तुलना में अगस्त में आपकी जमा पर करीबन एक फीसदी का ज्यादा ब्याज मिल सकता है। जब बैंक एफडी की दरों को बढ़ाएंगे तो निश्चित तौर पर कॉरपोरेट भी यही काम करेंगे। 

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