अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच सकती है कपास की खेती 

मुंबई- भारत में कपास की खेती इस साल सर्वोच्च स्तर पर पहुंच सकती है। इस बार रकबा के 15 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है। दुनिया भर में फाइबर का सबसे ज्यादा उत्पादन भारत में होता है। इस फसल की इतनी ज्यादा कीमत मिलती है कि दूसरी फसलों के किसान अब इसकी खेती करने लगे हैं।  

उद्योग संगठनों का कहना है कि ज्यादा पैदावार से वैश्विक और स्थानीय कपास की कीमतों को नियंत्रण करने में मदद मिल सकती है। इससे एशियाई परिधान निर्माता काफी परेशान हैं। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अतुल गणात्रा ने कहा कि भारत में कपास का रकबा इसलिए बढ़ रहा है, क्योंकि अन्य फसलों की तुलना में इससे किसानों को ज्यादा फायदा मिल रहा है। 

पिछले एक साल में कपास की कीमतें दोगुना हो गई हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि कटाई के दौरान हुई बारिश ने 2021 की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। इससे एक दशक में सबसे कम फसल का उत्पादन हुआ। कपास की खेती में अगर 15 फीसदी की बढ़त होती है तो 2022 में यह लगभग 1.38 हेक्टेयर तक बढ़ जाएगी। पिछले साल यह 1.2 हेक्टेयर थी। 

एसोसिएशन को उम्मीद है कि कपास क्षेत्र में सबसे बड़ा विस्तार गुजरात और महाराष्ट्र में होगा। यह दोनों राज्य इसके उत्पादन में आधा हिस्सा रखते हैं। गुजरात के एक किसान ने कहा कि पिछले साल मैने 21 एकड़ जमीन पर कपास और 10 एकड़ में मूंगफली उगाई थी। चूंकि कपास की कीमतें ज्यादा हैं, इसलिए मैं पूरी खेती इसी की करूंगा। 

अधिकांश भारतीय किसान जून में मानसून की बारिश की शुरुआत में कपास बोना शुरू करते हैं। हालांकि कुछ किसान मई में ही इसे शुरू कर देते हैं। एक ग्लोबल ट्रेडिंग कंपनी के डीलर ने कहा कि दालों ने पिछले कुछ वर्षों में किसानों को कम फायदा दिया है। इससे किसान अब कपास की ओर रूख कर रहे हैं। उनके मुताबिक, यह फसल बारिश पर आधारित होती है, इसलिए मानसून की इसमें प्रमुख भूमिका होती है। 

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