इस साल 7.5 फीसदी रहेगी विकास दर, 16 फीसदी बढ़ेगा जीडीपी का आकार 

मुंबई। भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2022-23 में 0.20 फीसदी बढक़र 7.5 फीसदी रह सकती है। इस दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आकार में भी 16.1 फीसदी का इजाफा होगा।  

एसबीआई रिसर्च ने एक रिपोर्ट में कहा कि उच्च महंगाई और उसके बाद ब्याज दरों में होने वाली वृद्धि को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी में 11.1 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होगी। यह 2022-23 में 7.5 फीसदी की वास्वतिक जीडीपी वृद्धि का दर्शाता है, जो हमारे पिछले अनुमान से 0.20 फीसदी ज्यादा है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा मूल्य पर 2021-22 में जीडीपी का आकार 38.6 लाख करोड़ बढक़र 237 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो सालाना आधार पर 19.5 फीसदी अधिक है। 2022-23 की पहली छमाही में महंगाई अगर उच्च स्तर पर रहती है तो मौजूदा मूल्य पर इस साल जीडीपी का आकार 16.1 फीसदी बढक़र 275 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा।  

उधर, हाल ही में जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2021-22 में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 8.7 फीसदी रही। इस दौरान जीडीपी 11.8 लाख करोड़ बढक़र 147 लाख करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, महामारी आने से पहले के वित्त वर्ष 2019-20 के मुकाबले यह सिर्फ 1.5 फीसदी ही ज्यादा है। 

एसबीआई के मुख्य अर्थशास्त्री सोम्यकांति घोष ने कहा कि कच्चे तेल के दाम 120 डॉलर प्रति बैरल से अधिक रहने से चालू वित्त वर्ष में महंगाई दर 6.5-6.7 फीसदी रह सकती है। तरलता के मोर्चे पर रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई रेपो दर धीरे-धीरे बढ़ाकर आर्थिक वृद्धि को समर्थन देगा।  

जून और अगस्त में होने वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो दर में 0.50 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में भी जून में 0.25 फीसदी बढ़ सकता है। इसमें आगे कहा गया है कि केंद्रीय बैंक कोविड काल में चार फीसदी रही रपो दर में 1.25-1.50 फीसदी तक वृद्धि कर सकता है। 

रिपोर्ट में कंपनियों की कमाई एवं मुनाफे में बढ़ोतरी, बैंकों के बढ़ते कर्ज और प्रणाली में मौजूद पर्याप्त नगदी का भी ध्यान रखा गया है। इसके मुताबिक, शेयर बाजार में सूचीबद्ध करीब 2,000 कंपनियों की कमाई 2021-22 में 29 फीसदी बढ़ी, जबकि मुनाफे में 52 फीसदी इजाफा हुआ है। इस दौरान निर्माण क्षेत्र की कंपनियों के राजस्व एवं मुनाफे में क्रमश: 45 फीसदी और 53 फीसदी की बढ़ोतरी रही।   

यूबीएस सिक्योरिटीज का कहना है कि 2022-23 में राजकोषीय घाटा बढक़र जीडीपी के 10.2 फीसदी के उच्च स्तर पर पहुंच सकता है। हालांकि, यह एक साल पहले के मुकाबले 0.20 फीसदी कम होगा। इस दौरान केंद्र और राज्यों का संयुक्त राजकोषीय घाटा 9.8 फीसदी रहने का अनुमान है। इसमें केंद्र का घाटा 6.4 फीसदी और राज्यों का 3.4 फीसदी रह सकता है।  

ब्रोकरेज फर्म की मुख्य अर्थशास्त्री (भारत) तन्वी गुप्ता जैन ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में महंगाई औसतन 6.5-7 फीसदी रहने पर आरबीआई 2022-23 के अंत तक रेपो दर को बढ़ाकर 5.5 फीसदी तक ले जा सकता है। 2023-24 अंत तक यह 6 फीसदी तक पहुंच सकता है। महंगाई को काबू करने के इन कदमों से राजकोषीय घाटा 10.2 फीसदी के स्तर पर पहुंच सकता है। 

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