गेहूं का फर्जी निर्यात रुकेगा, नकली कागजात पर होगी सीबीआई जांच  

मुंबई- गेहूं के निर्यात में हो रही धांधली पर विदेश व्यापार निदेशालय (डीजीएफटी) ने बड़ा फैसला लिया है। इसने अपने क्षेत्रीय अधिकारियों को कहा है कि निर्यात के लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) जारी करने से पहले उसके सभी कागजातों का भौतिक सत्यापन किया जाए।

 वाणिज्य मंत्रालय के आदेश पर यह काम किया गया है। अब देश से बाहर गेहूं भेजने वालों को 13 मई या उससे पहले के लेटर ऑफ क्रेडिट (एलओसी) के साथ विदेशी बैंक के साथ हुई बातचीत की तारीख भी बतानी होगी। अगर किसी तरह की गड़बड़ी पाई गई तो इसकी सीबीआई जांच कराई जाएगी। 

डीजीएफटी ने सोमवार और मंगलवार को दो नोटिस जारी किया। इसने कहा कि सरकार ने 13 मई को गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था। पर उसके पहले जिन निर्यातकों ने एलओसी हासिल किया है, वे ही निर्यात कर पाएंगे। नोटिस के मुताबिक कुछ निर्यातकों की ओर से फर्जी आरसी मिली थी, जिसके बाद यह फैसला लिया गया है। 

डीजीएफटी ने कहा कि निर्यातकों को मंजूरी मिली हो या मंजूरी प्रक्रिया में हो, दोनों स्थितियों में कागजात का सत्यापन होगा। जरूरत हुई तो पेशेवर एजेंसी की भी मदद ली जाएगी। मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) से भी कराई जाएगी, और इसमें बैंकर अगर गलत पाए गए तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी। 

मुंबई- गेहूं के निर्यात में हो रही धांधली पर विदेश व्यापार निदेशालय (डीजीएफटी) ने बड़ा फैसला लिया है। इसने अपने क्षेत्रीय अधिकारियों को कहा है कि निर्यात के लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) जारी करने से पहले उसके सभी कागजातों का भौतिक सत्यापन किया जाए।  

वाणिज्य मंत्रालय के आदेश पर यह काम किया गया है। अब देश से बाहर गेहूं भेजने वालों को 13 मई या उससे पहले के लेटर ऑफ क्रेडिट (एलओसी) के साथ विदेशी बैंक के साथ हुई बातचीत की तारीख भी बतानी होगी। अगर किसी तरह की गड़बड़ी पाई गई तो इसकी सीबीआई जांच कराई जाएगी। 

डीजीएफटी ने सोमवार और मंगलवार को दो नोटिस जारी किया। इसने कहा कि सरकार ने 13 मई को गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था। पर उसके पहले जिन निर्यातकों ने एलओसी हासिल किया है, वे ही निर्यात कर पाएंगे। नोटिस के मुताबिक कुछ निर्यातकों की ओर से फर्जी आरसी मिली थी, जिसके बाद यह फैसला लिया गया है। 

डीजीएफटी ने कहा कि निर्यातकों को मंजूरी मिली हो या मंजूरी प्रक्रिया में हो, दोनों स्थितियों में कागजात का सत्यापन होगा। जरूरत हुई तो पेशेवर एजेंसी की भी मदद ली जाएगी। मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) से भी कराई जाएगी, और इसमें बैंकर अगर गलत पाए गए तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी। 

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