संप्रग सरकार की तुलना में राजग सरकार में देश की विकास रही कम  

मुंबई- मोदी सरकार के राज में भले ही देश ने विकास दर का 22 सालों का रिकॉर्ड तोड़ा हो, लेकिन कांग्रेस की अगुवाई वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दौरान देश की विकास दर यानी जीडीपी ज्यादा रही है। 2021-22 में जीडीपी की विकास दर 8.7 फीसदी रही है।  

देश की आर्थिक वृद्धि दर का आंकड़ा 2006-07 में 10.08 प्रतिशत रहा जो कि उदारीकरण शुरू होने के बाद का सर्वाधिक वृद्धि आंकड़ा है। यह आंकड़ा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल का है। आजादी के बाद देखा जाए तो सर्वाधिक 10.2 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि दर 1988-89 में रही। उस समय प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। 

राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) द्वारा गठित ‘कमेटी ऑफ रियल सेक्टर स्टेटिस्टिक्स’ ने पिछली श्रृंखला (2004-05) के आधार पर जीडीपी आंकड़ा तैयार किया था। यह रिपोर्ट सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की वेबसाइट पर साल 2018 में जारी की गई थी। 

रिपोर्ट में पुरानी श्रृंखला (2004-05) और नई श्रंखला 2011-12 की कीमतों पर आधारित वृद्धि दर की तुलना की गई थी। पुरानी श्रंखला 2004-05 के तहत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर स्थिर मूल्य पर 2006-07 में 9.57 प्रतिशत रही। उस समय मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। नई श्रृंखला (2011-12) के तहत यह वृद्धि दर संशोधित होकर 10.08 प्रतिशत रहने की बात कही गई थी। 

वर्ष 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की अगुवाई में शुरू आर्थिक उदारीकरण की शुरूआत के बाद यह देश की सर्वाधिक वृद्धि दर है। 2018 तक संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) शासन के दौरान औसतन 8.1 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर मोदी सरकार के कार्यकाल की औसत वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत से अधिक रही है।  

हालांकि 2019-20 में जीडीपी में 4 फीसदी की उछाल आई थी जबकि 2020-21 में इसमें 7 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई थी। बता दें कि मोदी की अगुवाई वाली राजग सरकार ने जीडीपी के पुराने आधार को संशोधित कर 2011-12 के आधार पर अब जीडीपी पेश करती है।  

2021-22 में राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) के दूसरे अग्रिम अनुमान 8.9 फीसदी से 0.2 फीसदी कम है। महामारी के कारण 2020-21 में इसमें 6.6 फीसदी की गिरावट आई थी। एनएसओ के मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष की चौथी यानी जनवरी-मार्च तिमाही में विकास दर 4.1 फीसदी रही, जो इससे पिछली तिमाहियों से कम है। तीसरी यानी अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में अर्थव्यवस्था के बढ़ने की रफ्तार 5.4 फीसदी रही थी।  

दूसरी तिमाही में यह दर 8.4 फीसदी और पहली तिमाही में 20.1 फीसदी रही थी। जनवरी-मार्च, 2021 के दौरान विकास दर 2.5 फीसदी रही थी। इस साल की पहले तीन महीनों में चीन की विकास दर 4.8 फीसदी रही। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष के दौरान देश की वास्तविक जीडीपी बढ़कर 147.36 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। 2020-21 में यह आंकड़ा 135.58 लाख करोड़ रुपये रहा था। 

एनएसओ के आंकड़ों के मुताबिक, ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) की वृद्धि दर 2021-22 के दौरान 8.1 फीसदी रही। 2020-21 में 4.8 फीसदी की गिरावट आई थी। इस दौरान विनिर्माण क्षेत्र में 9.9 फीसदी की तेजी रही, जबकि 2020-21 में यह 0.6 फीसदी घटा था। खनन और निर्माण क्षेत्र में जीवीए की वृद्धि दर 11.5 फीसदी रही। इस साल फरवरी में पेश आर्थिक सर्वे में 2022-23 के दौरान विकास दर 8-8.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है। 

राजकोषीय घाटे के मोर्चे पर राहत की खबर है। 2021-22 के दौरान यह 6.71 फीसदी रहा, जो 6.9 फीसदी के संशोधित बजट अनुमान से कम है। आंकड़ों के मुताबिक, सरकार ने राजकोषीय घाटा पहले 6.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। बाद में इसे बढ़ाकर 6.9 फीसदी कर दिया गया।  

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीजीए) के मुताबिक, मार्च, 2022 में समाप्त वित्त वर्ष के लिए वास्तविक रूप में राजकोषीय घाटा 15,86,537 करोड़ रुपये रहा, जो जीडीपी का 6.4 फीसदी है। इस दौरान राजस्व घाटा 4.37 फीसदी रहा। 

देश के आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों का उत्पादन अप्रैल, 2022 में सालाना आधार पर 8.4 फीसदी बढ़ा है। 

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