महंगाई रोकना प्राथमिकता, वृद्धि दर भी जरूरी, चिंताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकते-आरबीआई 

मुंबई- आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि महंगाई को काबू करना ज्यादा महत्वपूर्ण है, वरना काबू से बाहर चली जाएगी। इसलिए इसे घटाकर मध्यम अवधि के लिए चार फीसदी के लक्ष्य के करीब लाना प्राथमिकता है। लेकिन, विकास दर की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। ऐसा नहीं हो सकता, जहां ऑपरेशन सफल हो जाए और मरीज मर गया हो। 

उन्होंने कहा कि आर्थिक वृद्धि दर के मामले में दूसरे देशों के मुकाबले भारत की स्थिति बेहतर दिख रही है। फिर भी वृद्धि दर को लेकर बड़ा झटका नहीं झेल सकते हैं। इससे महंगाई पर बुरा असर पड़ेगा। इसलिए हमें संतुलन बनाना होगा। गवर्नर ने कहा, जून में मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की होने वाली बैठक में तय महंगाई के अनुमान के आधार पर ही आगे कोई कदम उठाया जाएगा। यह अनुमान पिछले महीने की घटनाओं और उनका आगे पड़ने वाले प्रभाव पर आधारित होगा।  

महंगाई को रोकने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों और हालिया भू-राजनीतिक घटनाओं का भी ध्यान रखा जाएगा। एमपीसी के फैसले की घोषणा 8 जून को होगी। ज्यादातर अर्थशास्त्री महंगाई दर में और बढ़ोतरी का अनुमान जता रहे हैं। अप्रैल में खुदरा महंगाई 8 साल के उच्च स्तर 7.79 फीसदी पर पहुंच गई थी। 

केंद्रीय बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा कि उच्च थोक महंगाई के कारण खुदरा महंगाई पर दबाव बढ़ने का जोखिम है। औद्योगिक कच्चे माल की ऊंची कीमतें, परिवहन लागत, लॉजिस्टिक और आपूर्ति शृंखला में व्यवधान की महंगाई बढ़ाने में अहम भूमिका है। इसके लिए रूस-यूक्रेन युद्ध और उसके कारण कमोडिटी की बढ़ने वाली कीमतें भी जिम्मेदार हैं। हालांकि, महंगाई पर काबू पाने के लिए सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती के साथ कई कदम उठाए हैं। थोक महंगाई अप्रैल में बढ़कर रिकॉर्ड 15.08 फीसदी पर पहुंच गई थी। 

महामारी से उबर रही अर्थव्यवस्था की समावेशी, टिकाऊ और संतुलित वृद्धि के लिए मजबूत ढांचागत सुधार जरूरी है। इसके साथ ही वैश्विक महामारी के बाद के प्रभावों को देखते हुए कर्मचारियों में कौशल विकसित करना होगा और उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्हें नई प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल सिखाना होगा। आरबीआई ने कहा कि भू-राजनीतिक संकटों का महंगाई पर तुरंत असर पड़ा। तीन चौथाई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर खतरा मंडरा रहा है।  

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