फर्जी समीक्षा पर सरकार सख्त, ई-कॉमर्स कंपनियां हुईं तलब 

नई दिल्ली। उपभोक्ता मंत्रालय ने फर्जी रिव्यू कर ग्राहकों को गुमराह करने के मामले में ई-कॉमर्स कंपनियों के अधिकारियों को तलब किया है। मंत्रालय एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इंडिया (एएससीआई) के साथ इन कंपनियों के अधिकारियों को शुक्रवार को मीटिंग के लिए बुलाया है।  

इस बैठक में इस बात पर चर्चा होगी कि ई-कॉमर्स अपने प्लेटफॉर्म पर ऑन लाइन उत्पाद खरीदने और सेवाओं का किस तरह से समीक्षा करते हैं कि ग्राहक इस आधार पर खरीदारी के लिए तैयार हो जाते हैं। बैठक में इसका स्तर देखने और आगे की योजना बनाने पर फैसला होगा। 

इस बैठक में जिन प्रमुख कंपनियं के अधिकारियों को बुलाया गया है उसमें फ्लिपकार्ट, अमेजन, टाटा संस, रिलायंस रिटेल आदि शामिल हैं। इस बैठक में यह चर्चा होगी कि इस तरह के रिव्यू और गुमराह करने वाले कदमों को किस तरह से रोका जाए। साथ ही इसका ग्राहकों पर क्या असर होता है, इसे भी देखा जाएगा। 

उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने कहा कि कंपनियों के अलावा कंज्यूमर फोरम, कानून से संबंधित विश्वविद्यालयों, वकीलों, फिक्की, सीआईआई और अन्य ग्राहक अधिकार कार्यकर्ताओं को भी बुलाया गया है। ह फर्जी समीक्षाएं और भ्रामक सूचनाएं सूचना के अधिकार  जो कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम- 2019  के तहत एक उपभोक्ता अधिकार का उल्लंघन है। देश में  रोजमर्रा के जीवन में ऑनलाइन खरीदारी का प्रचलन लगातार बढ़ रहा है। इस दृष्टि से यह समीक्षाएं उपभोक्ता अधिकारों पर खासा प्रभाव डालती हैं। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि इसकी विस्तार से जांच की जाए और समाधान निकाले जाएं।             

सचिव ने कहा कि बैठक में वह हितधारकों के साथ यूरोपीय संघ-व्यापी द्वारा 223  प्रमुख वेबसाइटों पर ऑनलाइन उपभोक्ता समीक्षाओं के नतीजों को साझा करेंगे। इसमें पाया गया कि 55 फीसदी वेबसाइटें यूरोपीय संघ द्वारा तय खरीदी-बिक्री के नियमों का उल्लंघन कर रही थी। इसलिए उपभोक्ताओं को फर्जीवाड़े से बचाने के लिए उन्हें सही और गुणवत्तापूर्ण जानकारी देना जरूरी है। इसके अलावा 144 वेबसाइट के मामले में अधिकारी यह भी सत्यापित नहीं कर पाए की व्यापारी समीक्षाओं को प्रमाणिक बनाने के लिए किसी भी तरह का प्रयास कर रहे थे। 

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