निर्यात पर प्रतिबंध के बाद भी लोगों को सस्ता नहीं मिल रहा गेहूं 

मुंबई- गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद घरेलू बाजार में इसकी कीमतें कम नहीं हो रही हैं। लोगों को अब भी महंगे दाम पर गेहूं खरीदनी पड़ रही है। इसकी कई वजह हैं। वैश्विक बाजार में गेहूं की कीमतों में तेजी और भारत में भीषण गर्मी के कारण उत्पादन में गिरावट से कीमतों के मोर्चे पर राहत नहीं मिल पा रही है।  

भारत ने 13 मई, 2022 को गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था, उस दिन वैश्विक बाजार में इसका भाव 1,167.2 डॉलर प्रति बशल था। 17 मई को यह और बढ़कर 1,284 डॉलर प्रति बशल पहुंच गया। हालांकि, 25 मई को भाव में थोड़ा घटकर 1,128 डॉलर प्रति बशल पर आ गया। बेहतर उत्पादन और मजबूत भंडार के बावजूद वैश्विक बाजार में तेजी इसलिए बनी हुई है क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण आपूर्ति प्रभावित है।  

हालांकि, भारत को थोड़ी राहत इसलिए मिल रही है क्योंकि पिछले तीन-चार साल से उत्पादन बेहतर होने के कारण हमारे पास गेहूं का पर्याप्त भंडार बना हुआ है। फिर भी सस्ते दाम पर गेहूं खरीदने के लिए कुछ महीने तक इंतजार करना पड़ेगा। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि आर्थिक और कारोबारी गतिविधियों में तेजी के बाद गेहूं की मांग एवं खपत बढ़ी है। लेकिन, उत्पादन घटने के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है।  

इन वजहों के अलावा देश में महंगाई का चक्र बना हुआ है। यह हर 8-10 साल में एक बार बनता है। इससे पहले 2007-11 के बीच महंगाई का चक्र देखा गया था, जब कीमतें आसमान पर पहुंच गई थीं। मौजूदा चक्र के कारण अभी हम ऊर्जा महंगाई में फंसे हुए हैं, जिससे उत्पादन लागत में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले साल खाद्य तेल की महंगाई दहाई अंकों में पहुंच गई थी। 

देश में इस साल गेहूं उत्पादन में 7-8 फीसदी की कमी की आशंका है। फसल वर्ष 2021-22 के लिए पहले 11.13 करोड़ टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था। इसे घटाकर फिलहाल 10.5 से 10.6 करोड़ टन कर दिया गया है। फसल वर्ष 2020-21 में देश में 10.95 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन हुआ था। 

मौजूदा हालात को देखते हुए फिलहाल गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध जारी रहेगा। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि अभी दुनियाभर में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में अगर हम निर्यात शुरू कर देते हैं तो दुनियाभर में जमाखोरी की आशंका बढ़ सकती है। इससे उन देशों को कोई लाभ नहीं होगा, जिन्हें अनाज की जरूरत है। हमारे इस फैसले से दुनियाभर के बाजारों पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि वैश्विक व्यापार के मुकाबले भारत का निर्यात एक फीसदी से भी कम है। 

भारत 21 मार्च, 2022 तक कुल 70.30 लाख टन गेहूं का निर्यात कर चुका है। इनमें सबसे ज्यादा 39.37 लाख टन गेहूं बांग्लादेश को निर्यात किया गया है। श्रीलंका की हिस्सेदारी 5.80 लाख टन और संयुक्त अरब अमीरात की 4.70 लाख टन रही है। इससे पहले 2020-21 में 20.70 लाख गेहूं बाहर भेजा गया था। 

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