गैस, आटा के बाद अब सब्जियों की बारी, टमाटर 100 रुपये किलो 

मुंबई- एलपीजी गैस, आटा और तेल की लगातार बढ़ती महंगाई ने अब टमाटर और सब्जियों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। टमाटर की कीमतें कई जिलों में 100 रुपये किलो तक पहुंच गई हैं। जबकि की सब्जियां अब 60 रुपये किलो तक बिक रही हैं। इससे आम लोगों की रसोई में अब बजट बिगड़ता नजर आ रहा है।  

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में टमाटर की कीमतें 60-80 रुपये किलो हैं जबकि दक्षिण के कई राज्यों में यह 100 रुपये किलो तक पहुंच गई हैं। हालांकि जुलाई से भाव में कमी आने की उम्मीद है क्योंकि तब महाराष्ट्र में दोबारा टमाटर की फसलें शुरू हो जाएंगी। 

व्यापारियों के मुताबिक, आपूर्ति में कमी से कीमतें बढ़ रही हैं। टमाटर के अलावा हरी सब्जियां भी पिछले हफ्ते की तुलना में महंगी हो गई हैं। विक्रेताओं के मुताबिक, आने वाले दिनों में इनकी कीमतें और बढ़ सकती हैं, क्योंकि बारिश में अक्सर ये महंगी हो जाती हैं। 

एशिया की सबसे बड़ी सब्जी मंडी आजादपुर और गाजीपुर के विक्रेताओं के मुताबिक, टमाटर की आवक हाल के दिनों में एक तिहाई घट गई है। इससे कीमतों में इजाफा हो रहा है। यहां के खुदरा बाजार में टमाटर 65 से 80 रुपये किलो बिक रहा है। 

नींबू की कीमतें अभी भी बहुत ज्यादा नहीं घटी हैं और यह 200 से 250 रुपये किलो बिक रहा है। बैंगन 60 से 80 रुपये किलो बिक रहा है जबकि लौकी 50 रुपये और फूलगोभी 100 से 120 रुपये किलो बिक रही है। प्याज और आलू 40 रुपये किलो बिक रहा है तो शिमला मिर्च 100-130 रुपये किलो है। 

गाजर जहां 80 रुपये किलो बिक रहा है वहीं पालक 60 रुपये किलो बिक रहा है। इनके साथ और सब्जियां भी महंगी हो रही हैं। कारोबारियों का कहना है कि घाटे की वजह से किसानों ने इस बार ज्यादा बुआई सब्जियों की नहीं की है, इस वजह से आवक कम हो रही है। जिससे आने वाले दिनों में कीमतों पर और असर दिखेगा। 

उपभोक्ता मंत्रालय के मुताबिक, पिछले साल 25 मई को टमाटर की कीमतें 19 रुपये प्रति किलो थीं। इस आधार पर इसमें 5 गुना की तेजी आई है। जबकि 25 अप्रैल, 2022 को यह 30.27 रुपये और 20 मई, 2022 को 47 रुपये किलो थी। इसके आधार पर कीमतों में काफी तेजी आई है। 

कारोबारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा में भीषण गर्मी से फसलें खराब हो गई हैं। साथ ही महाराष्ट्र के कुछ जिलों में मानसून से पहले बारिश ने भी सब्जियों को प्रभावित किया है। साथ ही बड़ी मात्रा में टमाटर की मांग दक्षिण भारत से है, इसलिए वहां ज्यादा आपूर्ति है। 

कृषि मंत्रालय ने पहले अनुमान लगाया था कि 2021-22 में 203 लाख टमाटर पैदा हो सकता है जो उसके पहले के साल की तुलना में 211 लाख टन था। अब इसके 200 लाख टन पैदावार की आशंका है। 

Leave a Reply

Your email address will not be published.