मौजूदा वित्तवर्ष में भारत की विकास दर 7.3 फीसदी रहने की संभावना, एसएंडपी का अनुमान  

मुंबई- भारत की आर्थिक वृद्धि दर मौजूदा वित्त वर्ष में 7.3 फीसदी रहेगी। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट जारी कर वित्त वर्ष 23 के लिए भारत के विकास अनुमान को संशोधित करते हुए 7.8 फीसदी से घटाकर 7.3 फीसदी कर दिया है। 

अपने ग्लोबल मैक्रो अपडेट टू ग्रोथ फोरकास्ट में, एसएंडपी की ओर से कहा गया कि देश में महंगाई लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनी रहना एक बड़ी चिंता का विषय है, जिसके लिए केंद्रीय बैंकों को दरों में और ज्यादा इजाफा करने की आवश्यकता है। रिपोर्ट के अनुसार, जहां चालू वित्त वर्ष के लिए विकास अनुमान को घटाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया गया है, तो वहीं अगले वित्त वर्ष के लिए विकास दर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है। 

एसएंडपी ग्लोबल की ओर से जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि हमारे पूर्वानुमानों को संशोधित करने के लिए न केवल देश में बढ़ती महंगाई, बल्कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग का आगे बढ़ना भी जिम्मेदार है। इससे अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम और बढ़ सकता है। एसएंडपी ने चालू वित्त वर्ष में सीपीआई या खुदरा महंगाई दर 6.9 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।  

रिपोर्ट में यह अनुमान भी जताया गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने बीते वित्त वर्ष (2021-22) में 8.9 प्रतिशत की सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर्ज की है। गौरतलब है कि रूस-यूक्रेन युद्ध और कमोडिटी की बढ़ती कीमतों के बाद, विभिन्न वैश्विक एजेंसियों ने हाल ही में भारत के विकास दर के अनुमान में कटौती की है। 

जहां एक ओर विश्व बैंक ने अप्रैल में वित्त वर्ष 2022-23 के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद के पूर्वानुमान को 8.7 प्रतिशत से घटाकर 8 प्रतिशत कर दिया था, वहीं आईएमएफ ने अनुमानों को 9 प्रतिशत से घटाकर 8.2 प्रतिशत कर दिया था। इसके अलावा एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने भारत की वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जबकि आरबीआई ने अपने पूर्वानुमान को 7.8 प्रतिशत से घटाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया था।  

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