अमेरिका में मंदी का बहुत बड़ा खतरा, दुनिया भर में होगा इसका असर  

मुंबई- पहले कोरोना महामारी, फिर रूस-यूक्रेन युद्ध और अब महंगाई से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ रहा है। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी इससे अछूती नहीं हैं। अमेरिका में मंदी का बड़ा खतरा मंडरा रहा है।  

इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैश के सीनियर चेयरमैन लॉयड ब्लैंकफिन का कहना है कि अमेरिका में मंदी का बहुत बड़ा खतरा है। उन्होंने कंपनियों और ग्राहकों से इस मंदी से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है। उन्होंने कहा, ‘अगर मैं एक बड़ी कंपनी चलाता हूं, तो मैं इसके लिए तैयार रहूंगा।  

अगर मैं उपभोक्ता हूं, तो भी मैं इसके लिए तैयार रहूंगा।’ उन्होंने कहा कि एक मंदी केक में बेक नहीं होती है और इससे बचने की बहुत पतली गली होती है। गोल्डमैन के पूर्व सीईओ ने कहा कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (US Fed) के पास महंगाई से निपटने के लिए बहुत पावरफुल टूल है और इससे अच्छी प्रतिक्रिया भी मिल रही है। 

ईंधन की उच्च कीमतों और ठोस उपायों की कमी के चलते, अमेरिका में कंज्यूमर सेंटीमेंट मई की शुरुआत में साल 2011 के बाद के न्यूनतम स्तर पर चला गया है। अमेरिका में महंगाई भी उच्च स्तर पर बनी हुई है। ब्लैंकफीन की इन टिप्पणियों को उसी दिन प्रसारित किया गया, जब कंपनी के अर्थशास्त्रियों ने इस वर्ष के लिए अपने अमेरिकी विकास में कटौती की। इसके बाद वित्तीय बाजारों में गिरावट देखने को मिली।  

गोल्डमैन की आर्थिक टीम को अब उम्मीद है कि इस साल अमेरिका की जीडीपी 2.4 फीसद की दर से ग्रोथ करेगी। यह अनुमान पहले 2.6 फीसद था। इन्वेस्टमेंट बैंक ने साल 2023 के लिए अपने अनुमान को भी 2.2 फीसद से घटाकर 1.6 फीसद कर दिया है। गोल्डमैन सैश की रिपोर्ट में इसे “आवश्यक विकास मंदी” कहा है, ताकि महंगाई को कम करके फेड के लक्ष्य 2 फीसद तक लाया जा सके।  

हालांकि, मंदी बेरोजगारी को बढ़ाएगी, लेकिन गोल्डमैन इन्वेस्टमेंट बैंक आशावादी था कि बेरोजगारी में तेज वृद्धि से बचा जा सकता है। ब्लैंकफिन ने कहा कि अब महंगाई में थोड़ी गिरावट देखी जा सकती है, क्योंकि चीन में कोविड-लॉकडाउन धीरे-धीरे खुल रहा है और सप्लाई चेन में सुधार आ रहा है। हालांकि, ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी जैसी कुछ चीजें हैं, जो चिंता बढ़ा रही हैं। 

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