कंपनियों की चालाकी, हर सामान का वजन कम कर रहीं, कीमतें पुरानी  

मुंबई- अप्रैल में रिटेल महंगाई दर 8 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचकर 7.79% हो गई है। हालांकि, महंगाई की बढ़ने के बावजूद साबुन और कुकीज जैसे स्टेपल के सस्ते सिंगल-सर्विंग पैकेट की कीमत नहीं बढ़ रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि कंपनियां इनका रेट बढ़ाने के बजाय पैकेट का वजन घटा रही हैं। यानी उतने ही रुपए में कम सामान दे रही है। 

खाने के तेल, अनाज और ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच यूनिलीवर, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड और डाबर इंडिया लिमिटेड सहित अन्य कंपनियों ने अपने पैकेट्स की कीमत वही रखकर अंदर रखे सामान की मात्रा को घटा दिया है। ऐसा सिर्फ भारत में ही नहीं हो रहा है। हर जगह हो रहा है। 

हिंदुस्तान यूनिलीवर के मुख्य वित्तीय अधिकारी रितेश तिवारी ने कहा कि अगली दो से तीन तिमाहियों में महंगाई और ज्यादा बढ़ सकती है। इसलिए कुछ पैक्स में वॉल्यूम कम करना ही एक तरीका है। उदाहरण के लिए कंपनी का बर्तन धोने में इस्तेमाल होने वाला पॉपुलर प्रोडक्ट विम बार 10 रुपए में 155 ग्राम मिलता था। अब इसका वजन घटाकर 135 ग्राम कर दिया गया है। 

इसी तरह हल्दीराम का आलू भुजिया के पैक का वजन 55 ग्राम से घटकर 42 ग्राम हो गया है। तिवारी ने कहा कि एक और नई रणनीति जो कंपनियां अपना रही हैं वो है ‘ब्रिज’ पैक। हिंदुस्तान यूनिलीवर ने अपने 10 और 35 रुपए के लाइफबॉय साबुन के बीच एक नए साइज का पैक पेश किया है। पारले-जी बिस्किट की कीमत फरवरी में भी 5 रुपए थी और अब भी 5 रुपए ही है, लेकिन वजन 64 ग्राम से घटाकर 55 ग्राम कर दिया गया है। 

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