चार तिमाहियों तक दबाव में रहेगी अर्थव्यवस्था, मुद्राएं, शेयर बाजार, बिटकॉइन सहित सभी में भारी गिरावट   

मुंबई। इस समय पूरी दुनिया में सभी मोर्चों पर जो दबाव दिख रहा है, उससे उबरने में कम से कम तीन से चार तिमाही तक इंतजार करना होगा। दुनिया के शीर्ष देशों की मुद्राएं, शेयर बाजार, बिटकॉइन सहित सभी निवेश के साधनों में भारी गिरावट आई है। इस वजह से निवेशकों को भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ा है। साथ ही महंगाई का स्तर अब 40 साल के निचले स्तर पर कुछ देशों में पहुंच गया है। इससे आने वाले दिनों में लोगों की बचत पर कैंची चलेगी।  

हालात यह है कि विश्व के सभी देश अब विकास को रोक कर महंगाई को काबू में करना चाहते हैं जिसका सीधा असर दिख रहा है। तेल की ऊंची कीमतें इसमें और आग लगाने का काम कर रही हैं। भारत, यूके, अमेरिका, चीन और जापान के शेयर बाजार इस समय नीचे हैं। अमेरिकी डॉलर की तुलना में बाकी देशों की मुद्राओं में 12 फीसदी तक की गिरावट है। 

अमेरिकी डॉलर की तुलना में शीर्ष पांच मुद्राओं की पिछले एक महीने की बात करें तो रुपया 1.67 फीसदी टूटा है। इसी दौरान चीन का युआन 6.5, जापानी येन 17.38, यूरो 4.35 और ब्रिटिश पाउंड 6.49 फीसदी टूटा है। इससे पता चलता है कि भारतीय रुपया इन देशों की मुद्राओं की तुलना में कम गिरा है। 

इस साल में अब तक डॉलर की तुलना में जापान की मुद्रा सबसे ज्यादा गिरी है। जापानी येन 11.4 फीसदी टूटा है जबकि ब्रिटिश पाउंड 9.5, दक्षिण कोरिया की मुद्रा 7.1, चीन का युआन 5.4, यूरो 7.5 और भारतीय रुपया 3.8 फीसदी टूटा है। 

महंगाई से इस समय पूरी दुनिया जूझ रही है। अमेरिका में अप्रैल में महंगाई की दर 40 साल के ऊपरी स्तर 8.3 फीसदी पर पहुंच गई है। ब्रिटेन में यह 30 साल के ऊपरी स्तर 7 फीसदी पर, जबकि फ्रांस में यह 1990 के बाद 5.2 फीसदी के साथ सर्वोच्च स्तर पर है। भारत में यह 8 साल के शीर्ष पर है जो 7.79 फीसदी है। इसे काबू में करने के लिए 21 देशों ने ब्याज दरों को बढ़ाया है।   

भारत का निफ्टी पिछले एक महीने में 9.8 फीसदी गिरा है जबकि चीन का बाजार 4.14, जापान का शेयर बाजार 4.08, यूरोपियन बाजार 7.17 और ब्रिटिश का शेयर बाजार 4.91 फीसदी टूटा है। अमेरिका का डाउजोंस इंडस्ट्रियल औसतन 6.97 फीसदी टूटा है। भारत में एफआईआई नेे अक्तूबर से लेकर अब तक 1.87 लाख करोड़ रुपये की शेयर बाजार से निकासी की है। 11 अप्रैल के बाद से भारत के शेयर बाजार का पूंजीकरण 34 लाख करोड़ रुपये कम हुआ है। 

वैसे अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर के मामले में भारत की स्थिति अच्छी रही है। दिसंबर में यह 5.4 फीसदी की दर से बढ़ी है। जबकि चीन की अर्थव्यवस्था मार्च तिमाही में 4.4 फीसदी बढ़ी है। अमेरिका की जीडीपी इसी दौरान 1.4 फीसदी गिरी है तो यूके की 0.1 फीसदी गिरी है। जापान की जीडीपी में 0.8 फीसदी की गिरावट आई है। 

क्रिप्टोकरेंसी में भी निवेशकों के हाथ जले हैं। एक हफ्ते में बिटकॉइन की कीमत 17 फीसदी टूटी है। यह 16 महीने के निचले स्तर पर है। अप्रैल, 2021 में यह अपने शीर्ष 69,000 डॉलर पर थी। इथरियम 27 फीसदी टूटी है। पोलकाडाट 28 फीसदी गिरी है तो सोलाना इसी दौरान 38 फीसदी गिरी है। बिटकॉइन बृहस्पतिवार को 27 हजार डॉलर पर चली गई थी। नवंबर से अब तक यह 60 फीसदी टूट गई है। क्रिप्टो का बाजार पूंजीकरण अब 1.9 लाख करोड़ डॉलर है जो नवंबर, 2021 में 3.1 ट्रिलियन डॉलर था। 

कोई भी बाजार जब 20 फीसदी से ज्यादा टूटता है तो उसे मंदी की गिरफ्त में कहा जाता है। भारतीय बाजार अपने अक्तूबर के शीर्ष स्तर से अब तक 15 फीसदी टूट चुका है। अक्तूबर में 18,600 पर था जो बृहस्पतिवार को 15,800 तक चला गया था। अमेरिका का नैस्डैक मई में 8 फीसदी गिरा है। जबकि हांगकांग का बाजार इस साल 30 फीसदी टूट गया है। 

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था अगर 8 फीसदी सालाना बढ़ती है तो 2026 तक यह 5 लाख करोड़ डॉलर की हो सकती है। हालांकि 8 फीसदी की विकास दर फिलहाल एक दो साल तक संभव नहीं है। इस तरह से यह 2029 तक लक्ष्य हासिल हो सकता है। सरकार का लक्ष्य 2025 तक का है। आईएमएफ ने कहा है कि ऐसी स्थिति में रुपया डॉलर की तुलना में 94.4 तक जा सकता है। 

एडलवाइस म्यूचुअल फंड के मुख्य निवेश अधिकारी (सीआईओ) त्रिदीप भट्टाचार्य कहते हैं कि निकट समय में बाजार में उतार-चढ़ाव रहेगा। जब तक महंगाई, ब्याज दरों और पूंजी निवेश के बारे में कोई स्पष्टता नहीं होगी, बाजार में उतार-चढ़ाव रहेगा। ऐसे माहौल में निवेशकों को एकमुश्त निवेश करने के  बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना चाहिए। 

आईसीआईसीआई बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री समीर नारंग कहते हैं कि इस समय अर्थव्यवस्था की स्थिति काफी अच्छी है। जो भी अभी समस्याएं दिख रही हैं, वह वैश्विक स्तर की हैं। जब तक अमेरिकी बाजार में स्थिरता नहीं आएगी, तब तक हमारे बाजार पर भी इसका असर दिखेगा। महंगाई का असर कुछ समय तक बना रहेगा। तेल की कीमतें कम होती हैं तो फिर स्थितियां नियंत्रण में रह सकती हैं। 

के.आर चौकसी के एमडी देवेन चौकसी कहते हैं कि अभी कम से कम 3-4 तिमाहियों तक हालात खराब रहेंगे। कमोडिटी की कीमतें काफी ऊपर हैं। हालांकि यह अब शीर्ष पर है और यहां से नीचे आएगी, पर इसमें समय लगेगा। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस कहते हैं कि आयातित महंगाई काफी तेजी से बढ़ेगी। इसका मतलब खाने के तेल, सोने और कोल पर असर दिखेगा। 

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