दाल, चावल, कपड़े और जूते हुए महंगे, अप्रैल में खुदरा महंगाई 7.79 फीसदी  

मुंबई- आम आदमी को अप्रैल में महंगाई के मोर्चे पर झटका लगा है। खाने-पीने के सामान से लेकर तेल के दाम बढ़ने से महंगाई 8 साल के शीर्ष पर पहुंच गई है। गुरुवार को जारी किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित रिटेल महंगाई दर मार्च में बढ़कर 7.79% हो गई। 

यह लगातार चौथा महीना है जब महंगाई दर RBI की 6% की ऊपरी लिमिट के पार रही है। फरवरी 2022 में रिटेल महंगाई दर 6.07%, जनवरी में 6.01% और मार्चे में 6.95% दर्ज की गई थी। एक साल पहले अप्रैल 2021 में रिटेल महंगाई दर 4.23% थी।  

बीते दिनों रिजर्व बैंक ने इस वित्त वर्ष की अपनी पहली मौद्रिक नीति मीटिंग के बाद महंगाई के अनुमान को बढ़ाते हुए पहली तिमाही में 6.3%, दूसरी में 5%, तीसरी में 5.4% और चौथी में 5.1% कर दिया था। इसके बाद इमरजेंसी मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में महंगाई की चिंताओं के कारण ब्याज दरों को 0.40% बढ़ाने का फैसला लिया था। 

रिटेल महंगाई मापने के लिए कच्चे तेल, कमोडिटी की कीमतों, मैन्युफैक्चर्ड कॉस्ट के अलावा कई अन्य चीजें होती हैं, जिसकी रिटेल महंगाई की दर तय करने में अहम भूमिका होती है। करीब 299 सामान ऐसे हैं, जिनकी कीमतों के आधार पर रिटेल महंगाई का रेट तय होता है। 

दुनियाभर की कई अर्थव्यवस्थाएं महंगाई को मापने के लिए WPI (Wholesale Price Index) को अपना आधार मानती हैं। भारत में ऐसा नहीं होता। हमारे देश में WPI के साथ ही CPI को भी महंगाई चेक करने का स्केल माना जाता है। 

Leave a Reply

Your email address will not be published.