सरकार की ओला और उबर को चेतावनी, शिकायतों पर होगी सख्त कार्रवाई   

नई दिल्ली- सरकार ने ओला और उबर समेत एप आधारित कैब सुविधा देने वाली अन्य कंपनियों को अपनी प्रणाली में सुधार करने की चेतावनी दी है। साथ ही कहा कि कंपनियां अगर उपभोक्ताओं की लगातार बढ़ती शिकायतों का समाधान नहीं करती हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

मंगलवार को सरकार ने इन कंपनियों को तलब किया था, जिसमें इनके अनुचित व्यापार तरीकों की शिकायतों पर चर्चा हुई। इस दौरान किराये की गणना, अधिक कीमत (सर्ज प्राइस), यात्रा रद्द करने की पॉलिसी और ग्राहक संबंधी डाटा की सुरक्षा के लिए उनकी ओर से उठाए जा रहे कदमों के बारे में भी सवाल पूछे गए।  

बैठक के बाद उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने कहा, हमने उन्हें उनके मंच के खिलाफ उपभोक्ताओं की बढ़ती शिकायतों के बारे में बताया है। इसके आंकड़े भी दिए हैं। बैठक में ओला और उबर के साथ मेरु, जुगनू और रैपिडो के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।  

सचिव ने कहा कि ‘जागो ग्राहक जागो’ हेल्पलाइन पर बहुत अधिक शिकायतें मिली हैं। यह आंकड़े इन कैब कंपनियों के खिलाफ उपभोक्ताओं की नाराजगी को दर्शाते हैं। इन शिकायतों में पता चला है कि कैब ड्राइवर बुकिंग स्वीकार करने के बाद उपभोक्ताओं पर उसे रद्द करने का दबाव डालते हैं। बुकिंग रद्द करने पर उपभोक्ताओं पर ही जुर्माना लगाया जाता है। 

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) की मुख्य आयुक्त निधि खरे ने कहा कि कैब कंपनियों को तत्काल समस्या का समाधान करना चाहिए। एप आधारित कैब कंपनियां अनुचित व्यापार तरीकों के जरिये उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन न कर सकें, यह सुनिश्चित करने के लिए प्राधिकरण जल्द ही एक परामर्श जारी कर सकता है।  

खरे ने कहा, हमने कैब कंपनियों से यह भी पूछा कि एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए विभिन्न लोगों से अलग-अलग किराया क्यों वसूला जाता है। पिछले सप्ताह उन्होंने कहा था कि ओला एवं उबर जैसी कैब सेवाएं देने वाली कंपनियों के बारे में ग्राहकों से बढ़ा-चढ़ाकर कीमतें तय करने और मनमाने ढंग से बुकिंग रद्द कर देने जैसी कई शिकायतें मिली हैं।  

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