विदेशी निवेशकों ने एलआईसी को दिखाया ठेंगा, केवल 2.41 करोड़ शेयर के लिए आवेदन  

मुंबई- देश का सबसे बड़ा आईपीओ अंतिम दिन 2.95 गुना भरा। इसमें सबसे ज्यादा 6.11 गुना पॉलिसीधारकों का हिस्सा, जबकि 4.39 गुना कर्मचारियों का हिस्सा भरा। खुदरा निवेशकों ने अपने हिस्से की तुलना में 1.99 गुना की बोली लगाई जबकि गैर संस्थागत निवेशकों ने 2.91 गुना पैसा लगाया। क्यूआईबी का हिस्सा 2.83 गुना भरा। हालांकि विदेशी निवेशकों ने ठेंगा दिखा दिया।  

5 दिन तक खुले इस आईपीओ में 10 मर्चेंट बैंकर्स को नैया पार लगाने के लिए रखा गया था। फिर भी विदेशी निवेशकों ने आईपीओ में बहुत ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। हालांकि खुदरा निवेशकों ने सबसे ज्यादा आवेदन कर एक इतिहास बना दिया। 

खुदरा निवेशकों के लिए 6.91 करोड़ शेयर आरक्षित थे और इनकी तुलना में 13.76 करोड़ शेयरों के लिए बोली मिली। इसे कुल 60 लाख से ज्यादा आवेदन मिले, जबकि रिलायंस पावर को 2008 में खुदरा निवेशकों के हिस्से के लिए 48 लाख आवेदन मिला था। देश के आईपीओ के इतिहास में पहली बार किसी इश्यू के लिए खुदरा निवेशकों की ओर से इतने बड़े पैमाने पर आवेदन मिला है। 

एलआईसी ने कुल 16.20 करोड़ शेयर जारी किया था। इसकी तुलना में इसे 47.81 करोड़ शेयरों के लिए आवेदन मिला। वैसे विदेशी निवेशकों ने इस आईपीओ से दूरी बनाए रखी। हालांकि उनके लिए एफडीआई के नियमों में भी बदलाव किया गया, पर उन्होंने दिलचस्पी नहीं दिखाई।  

आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार की दोपहर तक विदेशी निवेशकों संस्थागत निवेशकों के हिस्से के लिए केवल 2 फीसदी बोली लगाई। इसी तरह एंकर निवेशकों में भी बहुत कम एफआईआई ने बोली लगाई थी। इसने केवल 2.41 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगाई जबकि क्यूआईबी के लिए 11 करोड़ से ज्यादा शेयर आरक्षित थे। 

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