ठेले पर सब्जी बेचने वाली की बेटी बनी सिविल जज, छोटे से कमरे में करती थी पढ़ाई   

मुंबई- इंदौर में सब्जी बेचने वाले की बेटी सिविल जज बन गई है। 25 साल की अंकिता नागर ने ये खुशखबरी सबसे पहले ठेले पर सब्जी बेच रही अपनी मां की दी। अंकिता नागर ने सिविल जज एग्जाम में अपने SC कोटे में 5वां स्थान हासिल किया है। उन्होंने बताया कि परिवार में सभी सदस्य सब्जी बेचने का काम करते हैं।  

उनके पापा सुबह 5 बजे उठकर मंडी चले जाते हैं। मम्मी सुबह 8 बजे सभी के लिए खाना बनाकर पापा के सब्जी के ठेले पर चली जाती हैं, फिर दोनों सब्जी बेचते हैं। बड़ा भाई आकाश रेत मंडी में मजदूरी करता है। छोटी बहन की शादी हो चुकी है। सिविल जज के लिए सिलेक्शन होते ही अंकिता सबसे सब्जी बेच रही मां के पास पहुंचीं और उन्हें खुशखबरी दी। 

अंकिता रोजाना 8 घंटे पढ़ाई को देती थीं। शाम को जब ठेले पर अधिक भीड़ हो जाती तो सब्जी बेचने चली जाती थीं। रात 10 बजे दुकान बंद कर घर आ जाते थे। फिर रात 11 बजे से पढ़ाई करने बैठ जातीं। अंकिता  ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए बहुत संघर्ष किया। एक छोटे से कमरे में कम लाइट में घंटों पढ़ाई की।  

अंकिता ने बताया, मैं तीन साल से सिविल जज की तैयारी कर रही हूं। 2017 में इंदौर के वैष्णव कॉलेज से एलएलबी किया। इसके बाद 2021 में एलएलएम की परीक्षा पास की। पिता उधार लेकर कॉलेज की फीस भरते थे। कॉलेज के बाद लगातार सिविल जज की तैयारी में जुटी रही। दो बार सिलेक्शन नहीं होने के बाद भी माता-पिता हौसला दिलाते रहे।  

अपने रिजल्ट से निराश न हों अपने अनुभव साझा करते हुए अंकिता ने कहा कि रिजल्ट में नंबर कम-ज्यादा आते रहते हैं, लेकिन छात्र-छात्राओं को हौसला रखना चाहिए। असफलता मिलने पर नए सिरे से कोशिशें करना चाहिए। भविष्य में जरूर अच्छा रिजल्ट आएगा। अंकिता ने बताया कि उनके घर में कमरे बहुत छोटे हैं।  

गर्मी में छत पर लगे पतरे इतने गर्म हो जाते हैं कि पसीने से किताबें गीली हो जाती थीं। बारिश में पानी टपकता है। गर्मी देख भाई ने अपनी मजदूरी से रुपए बचाकर कुछ दिन पहले ही एक कूलर दिलवाया है। मेरे परिवार ने मेरी पढ़ाई के लिए इतना कुछ किया है, जिसे बताने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है। 

अंकिता के पिता अशोक नागर ने बताया अंकिता ने लंबे समय तक संघर्ष किया। हमारी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, ऐसे में अंकिता की पढ़ाई के लिए हमें कई बार रुपए उधार लेना पड़े पर उसकी पढ़ाई नहीं रुकने दी। अंकिता की मां लक्ष्मी ने बताया कि बेटी के जज बनने की खबर सुनते ही मेरी आंखों से आंसू छलक पड़े। काफी देर तक आंसू रुके ही नहीं। 

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