महंगाई बढ़ने की आशंका से जून में 25 बीपीएस बढ़ सकता है रेपो रेट  

मुंबई। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि महंगाई की दर लगातार ऊंची बनी हुई है और 10 साल के सरकारी बेंचमार्क का यील्ड 28 बीपीएस बढ़कर 7.40 फीसदी हो गया है। जानकारों का मानना है की जून की एमपीसी की बैठक में फिर से 25 बीपीएस रेपो रेट में बढ़ोतरी हो सकती है। क्योंकि महंगाई की दरें आगे ऊपर ही रहनेवाली हैं।  

अप्रैल में ही उदार रूख को वापस लेने की बात कही गई थी, और कल के फैसले को उसी के तहत देखा जाना चाहिए। यानी मई 2020 में जिस तरह से दरों को कम करने का फैसला हुआ था, उसे वापस लिया जा रहा है। वैसे यह पहले से ही अनुमान था कि रिजर्व बैंक अगली बैठक में नीतिगत दरों को बढ़ा सकता है, क्योंकि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक ऐसा ही कर रहे हैं।  

अमेरिकी फेडरल बैंक दरों में आधा फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है। पर आरबीआई ने अचानक बीच में ही यह फैसला कर दिया। रिजर्व बैंक ने अपना फोकस विकास की बजाय महंगाई पर कर दिया है। अप्रैल की मीटिंग में इसने कहा कि मार्च में सीपीआई 6.95 फीसदी से ऊपर था, जो 17 महीने के शीर्ष स्तर पर था। इसलिए उसका फोकस विकास के बजाय महंगाई को रोकने पर है। 

गवर्नर ने कहा कि महंगाई से जुड़े संवेदनशील आइटम जैसे खाने के तेल की कीमतें पहले से ऊंची हैं क्योंकि प्रमुख उत्पादक देशों ने आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही खाद की भी कीमतें ऊंची हैं। कुछ अन्य इनपुट लागत ज्यादा होने से खाद्य की कीमतों पर असर दिखा है। 12 खाद्य पदार्थों में से 9 की कीमतें मार्च में बढ़ी हैं। 

एमपीसी का मानना है कि महंगाई की दरें आने वाले महीनों में भी ऊंची रह सकती हैं। आरबीआई ने 2-6 फीसदी महंगाई के  दायरे का लक्ष्य तय किया था, लेकिन यह उससे ऊंची रही है। अप्रैल में इसने 2022-23 में महंगाई की दर 5.7 फीसदी के स्तर पर रहने की उम्मीद जताई थी और जीडीपी की वृद्धि दर का अनुमान 7.8 से घटाकर 7.2 फीसदी कर दिया था। उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति कमेटी का उद्द्ेश्य महंगाई की दरों को रोकना है और एक निश्चित दायरे में लाना है। यह दर विकास के लिए हानिकारक होती है। 

आरबीआई ने कोरोना में विकास को गति देने के लिए फरवरी, 2019 से रेपो रेट में ढाई फीसदी की कमी की थी। इसमें 27 मार्च 2020 को 75 बेसिस प्वाइंट और 22 मई, 2020 को 40 बीपीएस की कटौती की थी। 

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