21 देशों ने अप्रैल और मई में ब्याज दरों में किया इजाफा, महंगाई बनी रहेगी  

मुंबई। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद भी महंगाई की दर कुछ समय तक ऊंची बनी रहेगी।  

इसके मुताबिक, महंगाई की दरें लंबे समय से ऊपर हैं और मार्च में तो यह 17 महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच गई थी। इसलिए आरबीआई मार्च, 2023 तक कम से कम .75 फीसदी तक रेपो रेट को बढ़ाएगा, जो 5.15 फीसदी तक जा सकता है। आरबीआई की कोशिश है कि वह कोरोना के पहले के स्तर पर दरों को ले जाएगा।   

रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में बुधवार को .4 फीसदी के इजाफे के बाद एसबीआई के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्यकांति घोष ने रिपोर्ट में कहा कि यह बैंकों के लिए अच्छा कदम है। हालांकि इससे उनके फंड की लागत बढ़ेगी क्योंकि नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में भी आधा पर्सेंट का इजाफा किया गया है। इससे जमा पर बैंकों को ज्यादा ब्याज देना होगा। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि रिजर्व बैंक का सीआरआर 21 मई से लागू होगा, यानी उसके बाद बैंकों के सिस्टम से पैसे निकलने शुरू हो जाएंगे। इससे 87 हजार करोड़ रुपये की निकासी हो सकती है। कोरोना के समय रिजर्व बैंक ने दो बार में रेपो रेट में 1.15 फीसदी की कटौती की थी। इसमें पहली बार मार्च, 2020 में .75 और दूसरी बार मई, 2020 में .40 फीसदी की कमी की गई थी। उसके बाद से दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया था। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगाई और देशों के बीच चल रहे तनाव के के मद्देनजर पूरी दुनिया के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को बढ़ाना शुरू कर दिए हैं। अप्रैल और मई में कुल 21 देशों ने नीतिगत दरों में इजाफा किया है। इसमें से 14 देशों ने आधा पर्सेंट की बढ़ोतरी की है। अमेरिका का केंद्रीय बैंक इसी हफ्ते ब्याज दरों में आधा पर्सेंट की बढ़ोतरी कर सकता है। यह साल 2000 के बाद सबसे ज्यादा इजाफा होगा और 16 सालों में पहली बार होगा कि लगातार दो मीटिंग में इसने दर को बढ़ा दिया है। 

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