कोयले की कमी से 16 राज्यों में 10-10 घंटे बिजली गुल  

मुंबई- भीषण गर्मी के चलते देशभर में बिजली की मांग बढ़ती जा रही है। ऐसे में देश के एक चौथाई पावर प्लांट बंद हैं। नतीजा, 16 राज्यों में 10 घंटे तक के बिजली कटौती शुरू हो गई है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, देशभर में 10 हजार मेगावॉट, यानी 15 करोड़ यूनिट की कटौती हो रही है, लेकिन बिजली की कमी वास्तव में कहीं ज्यादा है। इस बीच रेल मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है। 

रेलवे ने पावर प्लांट्स तक कोयले की तेजी से सप्लाई के लिए कुल 42 ट्रेनों को अनिश्चित काल के लिए कैंसिल कर दिया है, ताकि कोयला ले जा रही मालगाड़ियां समय पर निर्धारित स्टेशनों पर पहुंच सकें। भारतीय रेलवे के कार्यकारी निदेशक गौरव कृष्ण बंसल के मुताबिक पैसेंजर ट्रेनों को रद्द करने का फैसला अस्थायी है। स्थिति सामान्य होते ही सेवाएं वापस शुरू कर दी जाएंगी।  

इस फैसले के बाद रेलवे अपने बेड़े में एक लाख और वैगन जोड़ने जा रहा है। इसके अलावा रेलवे माल को तेजी से पहुंचाने के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर्स भी बना रहा है। अस्थायी रूप से रद्द की गई 42 ट्रेनों में लंबी दूरी की मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के 670 फेरे शामिल हैं। इसके साथ ही रेलवे ने कोल रैक्स की एवरेज डेली लोडिंग भी 400 से ज्यादा कर दी है। यह आंकड़ा पिछले 5 साल में सबसे ज्यादा है।  

रेलवे प्रति दिन 415 कोल रैक्स की ढुलाई कर रहा है, ताकि कोयले की मौजूदा मांग को पूरा किया जा सके। इनमें से हर एक कोल रैक में 3500 टन कोयला होता है। वहीं, बिजली कटौती का असर अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी होने लगा है। कोयले की कमी के गहराते संकट के बीच दिल्ली सरकार ने मेट्रो और अस्पतालों समेत कई आवश्यक संस्थानों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति में असमर्थता जताई है।  

NTPC ने कहा दादरी की सभी 6 और ऊंचाहार की 5 यूनिट्स पूरी क्षमता से चल रही हैं और वहां नियमित कोयला आपूर्ति हो रही है। मौजूदा स्टॉक क्रमशः 140000 मीट्रिक टन और 95,000 मीट्रिक टन है और आयात कोयले की आपूर्ति भी पाइपलाइन में है। 

उधर, अकेले उत्तर प्रदेश में ही 3 हजार मेगावॉट से ज्यादा की कमी है। वहां 23 हजार मेगावॉट बिजली की डिमांड है, जबकि सप्लाई 20 हजार मेगावॉट है। बिजली कटौती का मुख्य कारण देश के एक चौथाई बिजली प्लांट्स का बंद होना है। इनमें से 50% प्लांट कोयले की कमी के चलते बंद हैं। 

देश में बिजली उत्पादन की मौजूदा क्षमता 3.99 लाख मेगावॉट है। इसमें 1.10 लाख मेगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी (सोलर-विंड) की हिस्सेदारी है। बाकी बचे 2.89 लाख मेगावॉट में से 72,074 मेगावाॅट क्षमता के प्लांट बंद हैं। इनमें से 38,826 मेगावॉट क्षमता के प्लांट्स में उत्पादन हो सकता है, लेकिन ईंधन उपलब्ध नहीं है।  

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