इंडिगो के सात पायलटों पर गिर सकती है गाज, डीजीसीए लेगा फैसला  

मुंबई- इंडिगो एयरलाइन के सात पायलटों को वेतन से जुड़े मुद्दों पर कथित रूप से अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते पाया गया है। इन बातों के लिए पायलटों द्वारा इमरजेंसी फ्रिक्वेंसी का इस्तेमाल किया गया था। गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि सभी (पायलट) को कम वेतन के मुद्दे पर ‘121.5 मेगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी’ पर आपत्तिजनक भाषा में अपना गुस्सा जाहिर करते हुए पाया गया।  

गौरतलब है कि इस फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल विमान के मुसीबत में होने पर इमरजेंसी कम्युनिकेशन के लिए होता है। लेकिन पायलटों द्वारा इसका इस्तेमाल आपसी बातचीत के लिए किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) इसे लेकर सख्त है और मामले की जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि, इस पूरे प्रकरण पर इंडिगो एयरलाइंस की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई है। 

रिपोर्ट के अनुसार, ये घटना बीती नौ अप्रैल की है। बता दें कि इस फ्रीक्वेंसी की वायु यातायात नियंत्रक (एटीसी) द्वारा अनिवार्य रूप से निगरानी की जाती है। उस दिन इसमें इंडिगो की उड़ानों के पायलट आपस में इसी रेडियो फ्रिक्वेंसी पर बात कर रहे थे। इस निगरानी प्रक्रिया के जरिए ही पायलटों की यह अनौपचारिक बातचीत पकड़ में आई है।  

पायलटों की आपसी बातचीत के लिए 123.45 मेगाहर्ट्ज फ्रिक्वेंसी निर्धारित है, एटीसी इसकी निगरानी नहीं करता। इसके साथ ही गुरुवार को एयरलाइन पायलट एसोसिएशन (एएलपीए) ने नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को पत्र लिखकर गुहार लगाई है। एएलपीए ने कहा है कि हमारे साथी एविएटर्स को न्याय दिया जाए, जिन्हें इंडिगो एयरलाइंस से निलंबन के बाद इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया है।  

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