किसी तरह बची एलआईसी की इज्जत, महज 21 हजार करोड़ जुटाएगी  

मुंबई- लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) ने अपने 21,000 करोड़ रुपए के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए 902-949 रुपए प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। IPO में पॉलिसीधारकों को 60 रुपए की छूट मिलेगी और रिटेल निवेशकों और कर्मचारियों की छूट 45 रुपए होगी। कुछ मीडिया रिपोर्ट में ये दावा किया गया है। 

हालांकि एक लाख करोड़ रुपये का दावा करने वाली एलआईसी किसी तरह इज्जत बचाने में कामयाब हो गई है। देश का सबसे बड़ा आईपीओ का रिकार्ड करने के लिए वह पेटीएम से 3 हजार करोड़ रुपये ज्यादा का इश्यू ला रही है। हालांकि इसे कितना रिस्पांस मिलेगा, यह अभी तय नहीं है।  

केंद्र सरकार के सबसे बड़े और मूल्यवान एलआईसी आईपीओ का आकार घटाने के पीछे एक बड़ी वजह है। शेयर बाजार को स्थिर रखने और विदेशी निवेशकों के भारतीय बाजार से पलायन के कारण इसका साइज घटाया गया है। सरकार पहले यह जानना चाहती है कि इसका वास्तविक मूल्य क्या होना चाहिए। साथ ही छोटे इश्यू से यह भी पता चल जाएगा कि निवेशकों का रुझान इसके प्रति कितना है। इन सब वजह से मर्चेंट बैंकर्स ने इसके पूरे वैल्यूएशन और भाव को कम कर दिया है।  

पहले के वैल्यूएशन के लिहाज से इसे 1,800 रुपये के भाव पर लाने का अनुमान था। जबकि एक लाख करोड़ रुपये की जगह अब केवल 21 हजार करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे। आकार घटने से अब एलआईसी बाजार पूंजीकरण के लिहाज से पांचवीं सबसे बड़ी कंपनी होगी, जबकि पहले यह दूसरे नंबर की सबसे बड़ी कंपनी होने वाली थी। 6 लाख करोड़ से ज्यादा बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियों में रिलायंस, टीसीएस, एचडीएफसी बैंक और इन्फोसिस हैं। 

एलआईसी 27 अप्रैल को आईपीओ के भाव और अन्य जानकारी का खुलासा करेगी। इसी दिन इसका रोड शो है। कंपनी कर्मचारियों और पॉलिसीधारकों को भाव में 5-5 फीसदी का डिस्काउंट दे सकती है। इसके शेयर बाजार में 17-18 मई से कारोबार शुरू कर देंगे। 2 मई को यह एंकर निवेशकों के लिए खुलेगा। 

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. अरुण कुमार कहते हैं कि दरअसल शेयर बाजार के निवेशक कभी भी बाजार से ही पैसा निकाल कर वापस उसे लगाते हैं। ऐसा नहीं है कि कोई जमा पैसा हर बार बाजार में लगाता हो। ऐसे में अगर एक लाख करोड़ रुपये का आईपीओ आता तो इसी आधार पर बाजार से पैसे निकलते। इस वजह से बाजार में एक अस्थिरता का माहौल बन जाता। 

सूत्रों का कहना है कि सरकार इसी साल में या अगले साल एक बार फिर से एलआईसी का शेयर बाजार में एफपीओ के जरिये बेच सकती है। माना जा रहा है कि जब माहौल सुधरेगा तो एक अच्छी कीमत पर ज्यादा हिस्सेदारी बेचने की योजना बन सकती है। 

पिछले साल 28 मार्च को मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) केवी सुब्रमणियन ने कहा था कि सरकार एलआईसी में हिस्सेदारी बेचकर एक लाख करोड़ रुपये जुटा सकती है। अब यह 21,000 करोड़ रुपये हो गया है। यानी एक साल में यह 80 फीसदी घट गया है। दरअसल किसी भी आईपीओ के भाव को तय करने में मर्चेंट बैंकर्स की अहम भूमिका होती है। वे निवेशकों से राय लेकर उसी आधार पर भाव तय करते हैं। 

एलआईसी के एक पूर्व अधिकारी के मुताबिक, इस मामले में शुरुआत में ही जो हल्ला मचाया गया, उसका विपरीत असर देखा गया। बाजार के खराब माहौल में भी आईपीओ आते हैं और अच्छा रिस्पांस मिलता है। लेकिन जिस तरह से पहले से ही एलआईसी के वैल्यूएशन और जुटाई जाने वाली रकम को लेकर हो हल्ला मचाया गया, उसकी वजह से अब मामला फंस गया है। 

अधिकारी ने कहा कि जिस कंपनी का मार्केट शेयर 60 फीसदी से ज्यादा हो, ऐसी कंपनी से केवल 21,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए इतनी मशक्कत करनी पड़ रही है। जबकि घाटे वाली कंपनियां भी आज कल 18 हजार करोड़ रुपये जुटा रही हैं। 

अक्तूबर, 2019 में जब आईआरसीटीसी का आईपीओ आया तो उस समय इसका भाव 315 से 320 रुपये तय किया गया था। यह आईपीओ 111 गुना भरा था। लिस्टिंग के दिन यह 100 फीसदी ऊपर यानी 640 पर लिस्ट हुआ और बंद हुआ 728 रुपये पर। पिछले साल अक्तूबर में यह शेयर 6 हजार रुपये के पार पहुंच गया। इस मामले में लिस्टिंग के बाद ही सरकार ने मर्चेंट बैंकर्स को कम भाव रखने पर खूब खरी खोटी सुनाई थी। क्योंकि 6 हजार रुपये तक पहुंच शेयर को केवल 320 रुपये में बेचा गया था।  

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