आरबीआई का ब्याज दरें बढ़ाना राष्ट्रविरोधी गतिविधियां नहीं- रघुराम राजन

मुंबई- भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गनर्वर रघुराम राजन ने कहा है कि के केंद्रीय बैंक द्वारा महंगाई को काबू में करने के लिए ब्याज दरों को बढ़ाना ही होगा। इसे राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के रूप में नहीं देखना चाहिए। केंद्रीय बैंक को कभी न कभी यह काम करना ही होगा। राजनेताओं और नौकरशाहों को यह समझना जरूरी है कि नीतिगत दरों में बढ़ोतरी विदेशी निवेशकों को फायदा पहुंचाने वाली नहीं है।  

उन्होंने कहा कि महंगाई के खिलाफ लड़ाई कभी खत्म नहीं होती है। भारत में महंगाई की दरें बढ़ रही हैं। ऐसे में नीतिगत दरों को उसी तरह बढ़ाना होगा, जैसे पूरी दुनिया कर रही है। बेबाक राय रखने के लिये चर्चित राजन के अनुसार यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि ‘मुद्रास्फीति के खिलाफ अभियान’ कभी समाप्त नहीं होता। उन्होंने सोशल नेटवर्किंग साइट लिंक्डइन पर लिखा, ‘‘भारत में मुद्रास्फीति बढ़ रही है। एक समय पर आरबीआई को दुनिया के अन्य देशों की तरह नीतिगत दरें बढ़ानी ही पड़ेंगी।’ 

खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी से खुदरा महंगाई मार्च में 17 महीने के उच्चस्तर 6.95 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर से ऊपर है। वहीं कच्चे तेल और जिंसों के दाम में तेजी से थोक महंगाई दर मार्च महीने में चार महीने के उच्चस्तर 14.55 प्रतिशत पर पहुंच गई।

फिलहाल शिकॉगो बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस के प्रोफेसर राजन ने कहा, ‘‘राजनेताओं और नौकरशाहों को यह समझना होगा कि नीतिगत दर में वृद्धि कोई राष्ट्र-विरोधी कदम नहीं है, जिससे विदेशी निवेशकों को लाभ हो। बल्कि यह आर्थिक स्थिरता के लिये उठाया गया कदम है, जिसका सबसे ज्यादा लाभ देश को ही होता है।’’

गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में केंद्रीय बैंक ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में महंगाई में तेजी के बावजूद आर्थिक वृद्धि को गति देने के मकसद से नीतिगत दर रेपो को लगातार 11वीं बार निचले स्तर चार प्रतिशत पर बरकरार रखा था। आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिये खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाकर 5.7 प्रतिशत कर दिया जबकि पूर्व में इसके 4.5 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गयी थी। 

राजन ने अपने कार्यकाल के दौरान ऊंची नीतिगत दर रखकर अर्थव्यवस्था को पीछे धकेलने को लेकर होने वाली आलोचनाओं का जवाब भी दिया। उन्होंने लिखा है कि वह सितंबर, 2013 में तीन साल की अवधि के लिये आरबीआई गवर्नर बने थे। उस समय रुपये की विनिमय दर में भारी गिरावट के साथ भारत के सामने मुद्रा संकट की स्थिति थी।

पूर्व गवर्नर ने कहा, जब महंगाई 9.5 प्रतिशत थी, तब सितंबर, 2013 में महंगाई को काबू में लाने को रेपो दर को 7.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 8 प्रतिशत किया गया। जब महंगाई घटी, हमने रेपो दर 1.50 प्रतिशत घटाकर 6.5 प्रतिशत किया।  

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