दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ेगी अपनी अर्थव्यवस्था 

मुंबई – पूरी दुनिया में अगले दो सालों तक सबसे तेज गति से भारत की अर्थव्यवस्था के बढ़ने का अनुमान है। वित्तवर्ष 2022-23 में यह 9 फीसदी और 2023-24 में यह 7.1 फीसदी की दर से बढ़ सकती है। चाहे उभरती हुई देशों की अर्थव्यवस्थाएं हों या फिर विकसित देशों की बात हो, हर किसी को भारत पीछे छोड़ने के लिए तैयार है।  

इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (आईएमएफ) ने पूरी दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि के बारे में जो अनुमान लगाया है, उससे यह बात निकलकर सामने आई है। इसने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र अमेरिका की अर्थव्यवस्था 2022-23 में 4 और उसके अगले साल 2.6 फीसदी की दर से बढ़ सकती है। जबकि यूरो जोन की वृद्धि दर इसी दौरान 3.9 और 2.5 फीसदी रह सकती है। 

यूरो क्षेत्र में जर्मनी की अर्थव्यवस्था की विकास दर 2022-23 में 3.8 और 2.5 फीसदी रह सकती है जबकि फ्रांस की 3.5 और 1.8 फीसदी रहने का अनुमान है। इटली की वृद्धि दर इसी समय में 3.8 और 2.2 जबकि जापान की 3.3 और 1.8 फीसदी रह सकती है। उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में चीन की वृद्धि दर 2022-23 में 4.8 और उसके अगले साल में 5.2 फीसदी रह सकती है। रुस इसी दौरान 2.8 और 2.1 फीसदी की दर से जबकि ब्राजील 0.3 और 1.6 फीसदी की दर से विकास कर सकता है। 

मध्य पूर्व और मध्य एशिया की विकास दर 4.3 और 3.6 फीसदी रहने का अनुमान है। इसमें सउदी अरबिया की अर्थव्यवस्था 4.8 और 2.8 फीसदी की दर से बढ़ सकती है। हालांकि 2021-22 की बात करें तो सभी देशों की विकास 2022-23 और 2023-24 की तुलना में अच्छी रहने की उम्मीद है। 

इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड का अनुमान है कि अगले दो वर्षों में सभी देशों की अर्थव्यवस्था की विकास दर प्रभावित होगी। उदाहरण के तौर पर वैश्विक स्तर पर 2022 में विकास दर 4.4 और उसके अगले साल 3.8 फीसदी रह सकती है। विकसित देशों की वृद्धि दर 3.9 और 2.6 फीसदी जबकि उभरते और विकासशील देशों की वृद्धि दर 4.8 और 4.7 फीसदी रह सकती है। 

एशियन डेवलपमेंट बैंक ने अनुमान लगाया है कि 2022-23 में भारत 7.5 और 2023-24 में 8 फीसदी की दर से वृद्धि कर सकता है जबकि चीन की विकास की रफ्तार 5 और 4.3 फीसदी रह सकती है। हालांकि 2021-22 में भारतीय अर्थव्यवस्था 8.9 फीसदी की दर से बढ़ सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक और इंडिया रेटिंग का अनुमान है कि हमारी विकास दर 2022-23 में 7.2 फीसदी रह सकती है।   

लांकि, 2022-23 में भारत की विकास दर में और तेजी आ सकती थी, लेकिन रूस और यूक्रेन की वजह से इस पर थोड़ा असर पड़ने की आशंका है। साथ ही कच्चे तेलों की कीमतें भी विकास को प्रभावित करेंगी। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर विमल जालान के मुताबिक, एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत की वृद्धि दर 2020-21 में 8.9 फीसदी रह सकती है। 

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